शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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मूलम्-सार्धलक्षत्रयं नाड्यः सन्ति देहान्तरे
नृणाम् ॥ प्रधानभूता नाड्यस्तु तासु मु-
ख्याश्चतुर्दश ॥ १३ ॥ सुषुम्नेडा पिंगला
च गांधारी हस्तिजिह्विका ॥ कुहूः सरस्व-
ती पूषा शंखिनी च पयस्विनी ॥१४॥ वा-
रुणालम्बुसा चैव विश्वोदरी यशस्विनी ॥
एतासु तिस्रो मुख्याः स्युः पिङ्गलेडा सु-
षुम्निका ॥ १५ ॥
टीका-शरीरमें बहुत नाडी हैं परंतु उनमें प्रधान
नाडी साढेतीन लक्षहैं उनमेंसे मुख्य यह चौदह ना-
डी हैं १ सुषुम्णा २ इडा ३ पिङ्गला ४ गान्धारी ५ हस्ति-
जिह्वा ६ कुहू ७ सरस्वती ८ पूषा ९ शंखिनी १० पय-
स्विनी ११ वारुणा १२ अलंबुसा १३ विश्वोदरी १४ यश-
स्विनी इन चौदहमें भी तीन नाडी मुख्यहैं इडा, पिङ्ग-
ला, सुषुम्णा ॥ १३ ॥१४ ॥ १५ ॥
मूलम्-तिसृष्वेका सुषुम्नैव मुख्या सा
योगिवल्लभा ॥ अन्यास्तदाश्रयं कृत्वा
नाड्यः सन्ति हि देहिनाम् ॥ १६ ॥
टीका-इडा, पिङ्गला, सुषुम्णा इन तीन नाडियोंमें