शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३८ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
टीका-यह शरीर ब्रह्माण्डसंज्ञकहै जिस तरह संसा-
रमें सब देश और सुमेरु पर्वतहै उसी तरह शरीरमें
मेरु है उसके ऊपर सुधाकर अर्थात् चन्द्रमा आठ क-
लासे स्थितहै ॥ ५ ॥
मूलम्-वर्ततेऽहर्निशं सोऽपि सुधांवर्षत्य-
धोमुखः ॥ ६॥ ततोऽमृतं द्विधाभूतं याति
सूक्ष्मं यथा च वै ॥ इडामार्गेण पुष्ट्यर्थं
याति मन्दाकिनीजलम् ॥ पुष्णाति सकलं
देहमिडामार्गेण निश्चितम् ॥ ७ ॥
टीका-सोई चन्द्रमा रात्रि दिवस अधोमुख होके
अमृतकी वर्षा करते हैं वह अमृत सूक्ष्म दो भाग हो-
जाता है सो मन्दाकिनीके जलके समान देहके रक्षार्थ
इडा जो वामनाडी है उसके रन्ध्रसे सकल शरीरको
पोषण करता है ॥ ६ ॥ ७ ॥
मूलम्-एष पीयूषरश्मिर्हि वामपार्श्वे व्य-
वस्थितः ॥ ८ ॥ अपरः शुद्धदुग्धाभो ह-
ठात्कर्षति मण्डलात् ॥ रन्ध्रमार्गेण सृ-
ष्ट्यर्थं मेरौ संयाति चन्द्रमाः ॥ ९ ॥
टीका-वही सुधाकिरण संयुक्त इडा नाडीकी स्थिति
वामभागमें है और शुद्ध दूधके समान मेरुमें चन्द्रम