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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 174, कुल 216 में से

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पृष्ठ 174

लानि वै॥ तानि सर्वाणि सुतरामेतज्ज्ञा-
नाद्भवन्ति हि ॥ १५३ ॥
टीका -पंच पद्मका जो जो फल पहिले कहाहै सो
सबका समस्त फल आपही इस आज्ञाकमलके ध्यान-
सेही प्राप्त होजायगा ॥ १५३ ॥
मूलम्--यः करोति सदाभ्यासमाज्ञापद्मे वि-
चक्षणः॥ वासनाया महाबन्धं तिरस्कृ-
त्य प्रमोद्ते ॥ १५४ ॥
टीका-जो बुद्धिमान् सर्वदा मन स्थिर करके यह
आज्ञापद्मका अभ्यास करते हैं वह वासनारूपी महा-
बन्धको निरादर करके आनन्द लाभ करते हैं ॥१५४॥
मूलम्-प्राणप्रयाणसमये तत्पद्मं यः स्मर-
न्सुधीः॥ त्यजेत्प्राणं स धर्मात्मा परमा-
त्मनि लीयते ॥ १५५ ॥
टीका-जो बुद्धिमान् मृत्युके समय उस आज्ञापद्म-
का ध्यान करेगा सो धर्मात्मा प्राणको त्यागके परमा-
त्मामें लय होजायगा ॥ १५५ ॥
मूलम्-तिष्ठन् गच्छन् स्वपन् जाग्रत् यो-
ध्यानं कुरुते नरः॥ पापकर्म विकुर्वाणो
नहि मज्जति किल्विषे ॥ १५६ ॥