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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 156, कुल 216 में से

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पृष्ठ 156

( १५२ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
र्धनम् ॥ आरोग्यञ्च पटुत्वञ्च सर्वज्ञत्वञ्च
जायते ॥ ९२ ॥
टीका-यह ध्यान करनेसे शरीरमें उत्तम कांति
होती है और जठराग्नि वर्धित होताहै और शरीर
आरोग्य रहताहै और पटुता और सर्वज्ञता अर्थात्
सर्व वस्तुका ज्ञान उत्पन्न होता है ॥ ९२ ॥
मूलम्-भूतं भव्यं भविष्यञ्च वेत्ति सर्वं सका-
रणम् ॥ अश्रुतान्यपि शास्त्राणि सरहस्यं
वदेद्ध्रुवम् ॥ ९३ ॥
टीका-फिर भूत, भविष्य, वर्तमान तीनोंकाल और
सर्व वस्तुके कारणका ज्ञान होताहै और जो शास्त्र
कभी श्रवण नहीं कियाहै उसको रहस्यसहित व्या-
ख्या करनेकी शक्ति निश्चय उत्पन्न होती है ॥ ९३ ॥
मूलम्-वक्त्रे सरस्वती देवी सदा नृत्यति नि-
र्भरम् ॥ मन्त्रसिद्धिर्भवेत्तस्य जपादेव न
संशयः ॥ ९४ ॥
टीका-योगीके मुखमें सर्वदा निरंतर सरस्वती दे-
वी नृत्य करती है और योगीकी जपमात्रसे मन्त्रादिकी
सिद्धि होती है इसमें संशय नहीं है ॥ ९४ ॥
मूलम्-जरामरणदुःखौघान्नाशयति गुरोर्व-