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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 153

पंचमपटलः । ( १४९ )
भास्वरा॥सत्त्वं रजस्तमश्चेति गुणत्रयप्र-
सूतिका ॥ ८२ ॥
टीका-यह कुण्डलिनी देवी ईश्वरकी शक्तिमें तप्त
स्वर्णके समान निर्मल तेजप्रभा है और सत्व, रज, तम,
यह तीनों गुणकी माता है ॥ ८२ ॥
मूलम्-तत्र बन्धूकपुष्पाभं कामबीजं प्रकी-
र्तितम् ॥ कलहेमसमं योगे प्रयुक्ताक्षररू-
पिणम् ॥ ८३ ॥
टीका-जिस स्थानमें कुण्डलिनी है उसी स्थानमें
बन्धूकपुष्पके समान रक्तवर्ण कामबीजकी स्थिति
कहीगई है वह कामबीज तप्तस्वर्णके समान स्वरूप-
योगयुक्तद्वारा चिंतनीय है ॥ ८३ ॥
मूलम्--सुषुम्णापि च संश्लिष्टा बीजं तत्र वरं
स्थितम्॥शरच्चंद्रनिभं तेजस्स्वयमेतत्स्फु-
रत्स्थितम्॥८४ ॥सूर्यकोटिप्रतीकाशं च-
न्द्रकोटिसुशीतलम् ॥ एतत्रयं मिलित्वैव
देवी त्रिपुरभैरवी ॥बीजसंज्ञं परं तेजस्तदे-
व परिकीर्तितम् ॥ ८५ ॥
टीका-जिस स्थानमें कुण्डलिनी स्थित है सुषुम्णा
उसी स्थानमें कामबीजके साथ स्थित है और वह बीज