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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 151

पंचमपटलः । ( १४७ )
पादसे लेकर मस्तकपर्य्यन्त शरीरके वायुका पोषणक-
रते हैं ॥ ७३ ॥ ७४ ॥ ७५ ॥
मूलम्-नाडीभिराभिः सर्वाभिर्वायुः सञ्चर-
ते यदा ॥ तदैवान्नरसो देहे साम्येनेह प्रव-
र्त्तते ॥ ७६ ॥
टीका-जब सब नाडीके साथ वायु चलताहै तब
अन्नका रस शरीरमें समभावसे प्रवृत्त होता है ॥ ७६ ॥
मूलम्-चतुर्दशानां तत्रेह व्यापारे मुख्य-
भागतः ॥ ता अनुग्रत्वहीनाश्च प्राणस-
ञ्चारनाडिकाः ॥ ७७ ॥
टीका-सर्व नाडियोंमें पूर्वोक्त चौदह नाडी शरीर-
के मुख्य व्यापारको करतीहैं यह प्राण सञ्चार करने-
वाली चौदह नाडीमें परस्पर कोई किसीसे न्यून
अधिक नहीं है ॥ ७७ ॥
मूलम्-गुदाद्द्व्यंगुलतश्चोर्ध्वं मेढ्रैकांगुलत-
स्त्वधः ॥ एवञ्चास्ति समं कन्दं समता
चतुरंगुलम् ॥ ७८ ॥
टीका-गुदासे दो अङ्गुल ऊपर और मेढ्र अर्थात्
लिङ्गमूलसे एक अंगुल नीचे चार अंगुल विस्तारक-
न्दका प्रमाण है॥ ७८ ॥