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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 140

( १३६ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
टीका-आत्माका यह परमतेज जो पुरुष स्थिर-
चित्त होके क्षणमात्रभी देखेगा वह सर्वपापसे मुक्त होके
परमगतिको प्राप्तहोगा ॥ ३९ ॥
मूलम्-निरन्तरकृताभ्यासाद्योगीविगतक-
ल्मषः ॥ सर्वदेहादि विस्मृत्य तदभिन्नः
स्वयं गतः ॥ ४० ॥
टीका-निरंतर जो योगी शुद्धचित्त होके यह प्र-
तीकोपासनाका अभ्यास करेगा वह सर्व देहादिक-
मेंसे रहित होके आत्मासे अभिन्न होजायगा अर्थात्
आत्मास्वरूप होजायगा ॥ ४० ॥
मूलम्-यः करोति सदाभ्यासं गुप्ताचारेण
मानवः॥ स वै ब्रह्मविलीनः स्यात्पापकर्म-
रतो यदि ॥ ४१ ॥
टीका-जो मनुष्य गुप्ताचारसे इसका सर्वदा अभ्या-
स करताहै सो यदि पापकर्मरतभी हो तथापि उसका
मोक्ष होगा ॥ ४१ ॥
मूलम्-गोपनीयः प्रयत्नेन सद्यः प्रत्यय-
कारकः ॥ निर्वाणदायको लोके योगोयं
मम वल्लभः ॥ नादः संजायते तस्य क्रमे-
णाभ्यासतःश्च यः॥ ४२ ॥