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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 135

पञ्चमपटलः । ( १३१ )
बुद्धि हो लययोगमें समर्थहो स्वतन्त्र हो अर्थात् किसीके
आधीन न हो वीर्य्यवान् हो महाशय हो दयावान् हो क्षमा-
वान् हो सत्यवादी हो शूर हो समाधियोगमें श्रद्धा हो
गुरुपादपद्मपूजक हो योगाभ्यासरत हो ऐसे गुणवाले
पुरुषको अधिमात्र कहतेहैं योगाभ्याससे ऐसे पुरुष-
को छः वर्षमें सिद्धि प्राप्त होगी. गुरुको उचित है कि,
ऐसे धीर पुरुषको अङ्गसहित हठयोगका उपदेश
करे ॥ २२ ॥ २३ ॥ २४ ॥
अथ अधिमात्रतमसाधकलक्षणम् ।
मूलम्-महावीर्य्यान्वितोत्साही मनोज्ञः शौ-
र्य्यवानपि॥ शास्त्रज्ञोऽभ्यासशीलश्च निर्मो-
हश्च निराकुलः ॥ २५॥ नवयौवनसम्पन्नो
मिताहारी जितेंद्रियः ॥ निर्भयश्च शुचि-
र्दक्षो दाता सर्वजनाश्रयः ॥२६॥ अधि-
कारी स्थिरो धीमान् यथेच्छावस्थितः
क्षमी॥ सुशीलो धर्मचारी च गुप्तचेष्टः प्रि-
यंवदः ॥ २७ ॥ शास्त्रविश्वाससम्पन्नो
देवतागुरुपूजकः ॥ जनसंगविरक्तश्च म-
हाव्याधिविवर्जितः ॥ २८ ॥ अधिमात्र-
तमो ज्ञेयः सर्वयोगस्य साधकः ॥ त्रिभिः