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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 134

( १३०) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
बारह वर्षमें सिद्धि प्राप्त होगी ॥ १७ ॥ १८ ॥ १९ ॥
मूलम्-समबुद्धिः क्षमायुक्तः पुण्यकांक्षी
प्रियंवदः॥ मध्यस्थः सर्वकार्येषु सामा-
न्यः स्यान्न संशयः ॥ २० ॥ एतज्ज्ञात्वैव
गुरुभिर्दीयते मुक्तितो लयः ॥ २१ ॥
टीका-अब मध्यसाधकलक्षण कहतेहैं-सामान्य
बुद्धि हो क्षमावानहो पुण्यकर्म करनेमें इच्छा रखताहो
प्रिय बोलताहो सर्वकार्यमें मध्यस्थ रहताहो अर्थात् न
हर्ष न विषाद इसको मध्यसाधक कहतेहैं यह निश्च-
य है गुरु इसको विचारके मुक्तिमार्ग जो लययोग है
उसका उपदेश करे ॥ २० ॥२१ ॥
अथ अधिमात्रसाधकलक्षणम् ।
मूलम्-स्थिरबुद्धिर्लये युक्तः स्वाधीनो वी-
र्यवानपि ॥ महाशयो दयायुक्तः क्षमावा-
न् सत्यवानपि ॥२२॥ शूरो वयःस्थः श्र-
द्धावान् गुरुपादाब्जपूजकः ॥ योगाभ्या-
सरतश्चैव ज्ञातव्यश्चाधिमात्रकः ॥ २३ ॥
एतस्य सिद्धिः षड्वर्षेर्भवेदभ्यासयोग-
तः ॥ एतस्मै दीयते धीरो हठयोगश्च
साङ्गतः ॥ २४ ॥
टीका-अब अधिमात्र साधक लक्षण कहतेहैं स्थिर