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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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चतुर्थपटलः । ( ११७ )

टीका-बिन्दुपात होनेसे मृत्यु होती है और बिन्दु-
के धारणसे प्राणी जीवताहै इस कारणसे यत्नसे बिन्दु-
को धारण रखना उचित है ॥ ८८ ॥

मूलम्-जायते म्रियते लोके बिन्दुना नात्र
संशयः ॥ एतज्ज्ञात्वा सदा योगी बिन्दु-
धारणमाचरेत् ॥ ८९ ॥

टीका-प्राणीका जन्म मरण बिन्दुसे होताहै इसमें
संशय नहीं है. इस हेतुसे इसको विचारके योगीको उ-
चित है कि, विन्दुको सर्वदा धारण रक्खे ॥ ८९ ॥

मूलम्-सिद्धे बिन्दौ महायत्ने किं न सिध्य-
ति भूतले ॥ यस्य प्रसादान्महिमा ममा-
प्येतादृशो भवेत् ॥ ९० ॥

टीका--हे पार्वती ! यत्नपूर्वक बिन्दुके सिद्ध होनेसे
संसारमें क्या नहीं सिद्ध होसक्ता अर्थात् सब सिद्ध हो
सक्ताहै इसीके प्रसादसे हमारी ऐसी महिमा है ॥ ९० ॥

मूलम्-बिन्दुः करोति सर्वेषां सुखं दुःखञ्च
संस्थितः ॥ संसारिणां विमूढानां जरामर-
णशालिनाम् ॥ ९१ ॥ अयंच शांकरो
योगो योगिनामुत्तमोत्तमः ॥ ९२ ॥

टीका-बिन्दु संसारी मनुष्योंके सुख और दुःखका