शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
पृष्ठ 102, कुल 216 में से
संदर्भ में पढ़ें( ९८ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
टीका-हे प्रिये पार्वती ! इस तन्त्रमें महामुद्रा जो हम
कहतेहैं इसको लाभ करके पूर्व कपिलआदिक सिद्ध-
वरको सिद्धि प्राप्त भई ॥ २६ ॥
मूलम्--अपसव्येन संपीड्य पादमूलेन सा-
दरम् ॥ गुरूपदेशतो योनिं गुदमेढ्रान्तरा-
लगाम् ॥२७॥ सव्यं प्रसारितं पादं धृत्वा
पाणियुगेन वै ॥ नवद्वाराणि संयम्य चि-
बुकं हृदयोपरि ॥ २८ ॥ चित्तं चित्तपथे
दत्त्वा प्रभवेद्वायुसाधनम् ॥ महामुद्रा भ-
वेदेषा सर्वतन्त्रेषु गोपिता॥ २९ ॥वामाङ्गे-
न समभ्यस्य दक्षाङ्गेनाभ्यसेत्पुनः ॥ प्रा-
णायामं समं कृत्वा योगी नियतमा-
नसः ॥ ३० ॥
टीका-वामपादके एडीसे गुदा और मेढ़के मध्यमें
जो योनि है उसको आदरसहित गुरुके उपदेशपूर्वक
पीडितकरे अर्थात् दबावे और दक्षिणपाद प्रसारके अ-
र्थात् लम्बा करके दोनों हाथोंसे धरे और नवद्वारोंको रोक
करके चिबुक अर्थात् ठोडीको हृदयपर स्थित करे और
चित्तवृत्तिको चैतन्यमें स्थिर करके वायुका साधन कर-
ना उचित है यह महामुद्रा सर्वतन्त्रोंके प्रमाणसे गो-