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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 100

( ९६ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
मूलम्-योनिमुद्रा परं गोप्या न देया यस्य
कस्यचित् ॥ सर्वथा नैव दातव्या प्राणैः
कण्ठगतैरपि ॥ २० ॥
टीका-यह योनिमुद्रा परमगोपनीय है अनधिका-
रीको कदापि न दे यह सर्वथा देनेके योग्य नहीं है यदि
कण्ठगत प्राण होजायँ तो भी देना उचित नहीं है ॥२०॥
मूलम्--अधुना कथयिष्यामि योगसिद्धि-
करं परम् ॥ गोपनीयं सुसिद्धानां योगं
परमदुर्लभम् ॥ २१ ॥
टीका-हे देवी ! अब जो योग कहेंगे वह परमसिद्धिका
देनेवाला है सिद्ध लोगोंको इस परम दुर्लभ योगको
गोप्य रखना उचितहै ॥ २१ ॥
मूलम्-सुप्ता गुरुप्रसादेन यदा जागर्ति कु-
ण्डली ॥ तदा सर्वाणि पद्मानि भिद्यन्ते
ग्रन्थयोपि च ॥ २२ ॥
टीका-गुरूके प्रसादसे निद्रिता कुण्डलिनी देवी जब
जागृत होती है तब सर्व पद्म और सर्व ग्रंथी वेधित हो
जाती हैं अर्थात् सुषुम्णा रन्ध्रद्वारा प्राणवायु ब्रह्मरन्ध्र-
पर्यंत संचार करने लगजाताहै ॥ २२ ॥
मूलम्-तस्मात्सर्वप्रयत्नेन प्रबोधयितुमीश्व-