शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)
Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary
गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा
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श्लोक रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शंभुः प्रसीदति ।६।
भगवान् रुद्र की स्तुति का यह अष्टक उन शंकरजीकी तुष्टि
(प्रसन्नता) के लिए ब्राह्मणद्वारा कहा गया । जो मनुष्य इसे भक्ति-
पूर्वक पढ़ते हैं, उनपर भगवान् शम्भु प्रसन्न होते हैं ॥ ६ ॥
इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ।
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शिवपंचाक्षरस्तोत्र
श्रीगणेशाय नमः ॥ नागेन्द्र हाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय
महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय
।१। मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नमः शिवाय ॥ २ ॥
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय । श्रीनीलकण्ठाय
वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नमः शिवाय ॥ ३ ॥ वसिष्ठकुम्भोद्भव-
गौतमार्यमुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय । चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै
वकाराय नमः शिवाय ॥ ४ ॥ यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय
सनातनाय । दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नमः शिवाय
॥ ५ ॥ पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ । शिवलोकमवाप्नोति
शिवेन सह मोदते ॥ ६ ॥
॥ इति श्रीमच्छंकराचार्यविरचितं शिवपंचाक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
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