शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)
Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary
गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा
DevanagariSanskritpublished35 पृष्ठ
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२० शिवमहिम्नस्तोत्रम्
हे महेश्वर ! मैं नहीं जानता कि आप कैसे हैं ? आप चाहे जैसे
हों, आपके लिये मेरा नमस्कार है ॥ ४१ ॥
एकाकालं द्विकालं वा त्रिकालं यः पठेन्नरः ।
सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोके महीयते ॥४२॥
हे प्रभु ! प्रातःकाल या दोपहर या सायंकाल में या तीनों काल में
जो आपकी महिमा का गान करेगा, वह सब पापों से छूटकर आपके
लोक में सुख पूर्वक निवास करेगा ॥ ४२ ॥
इत्येषा वाङ्मयी पूजा श्रीमच्छङ्करपादयोः ।
अर्पिता तेन देवेशः प्रीयतां मे सदाशिवः ॥४३॥
इस प्रकार इस वाङ्मयी पूजा को मैं श्रीशङ्करजी के चरणों में
अर्पण करता हूँ, जिससे श्रीमहादेवजी मुझपर प्रसन्न रहें ॥ ४३ ॥
॥ इति भाषाटीकोपेतं श्रीशिवमहिम्नस्तोत्रं समाप्तम् ॥