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शिव गीता (पद्म पुराण - राम-शिव ज्ञान संवाद सटीक)

Shiva Gita from Padma Purana with Hindi Commentary

भगवान् शिव / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished44 पृष्ठ

सब ब्रह्मरुपही है, फिर विषयादिक मे कौनसी वस्तु त्यागनेके योग्य है, कारण कि (ईशावास्यमिदं सर्व
यत्किंचज्जगत्यां जगदिति श्रुतिः ) यह सब कुछ ब्रह्मही है ॥३५॥
इति श्रीपद्मपुराणे उत्तरखण्डे शिवगीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे शिवराघवसंवादे पण्डितज्वालाप्रसादमिश्रकृत
भाषाटीकायां जीवन्मुक्तिस्वरूपनिरूपणयोगो नामाष्टादशोऽध्यायः ॥१८॥
फाल्गुनकृष्ण त्रयोदशी, शशिदिन शंभु मनाये ॥
शिवगीताको तिलक यह, पूर्ण कियो मन लाय ॥१॥
उन्निससै पंचाश शुभ, सम्वत्सर सुखदान ॥
चंद्रमौलि शंकरसुमिर, भाष्यो गीताज्ञान ॥२॥
पढहिं सुनहिं आचरहिं जो, पावहिं पदनिर्वान ॥
भक्तिलहहिं शिवकी शुभद, नितनूतन कल्यान ॥३॥
हे शंकर यह आपके, अर्पण कियो बनाय ॥
करिये अंगीकार प्रभु, पुष्पांजलि गिरिशाय ॥४॥
नित ज्वालाप्रसाद पद, वन्दत वारंवार ॥
यह प्रसाद है आपको, करिये प्रभु निस्तार ॥५॥
॥श्रीसांबसदाशिवार्पणमस्तु॥