शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharangadhara Samhita with Dipika Hindi Commentary
शार्ङ्गधराचार्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें304 | शार्ङ्गधरसंहिता
पटोलादिगण क्वाथ ९२ | पिप्पल्यादि क्वाथ ९३ | ( तृतीयक ज्वर रोग )
धान्यनागर क्वाथ ९५ | सप्तमुष्टिक यूष १०४ | गुडूच्यादि क्वाथ ९१, ९५, ९६
( वातज ज्वर रोग ) | सञ्जीवनी बटी १३२ | पानीयकल्याणक घृत १४८
गुडूच्यादि क्वाथ ९१, ९५, ९६ | सूचिकाभरण रस १९७ | ( ज्वरातिसार रोग )
शालपर्ण्यादि क्वाथ ९१, ९६ | जलबन्धु रस १९७ | बृहद्गुडूच्यादि क्वाथ ९५
काश्मर्यादि क्वाथ ९१ | पञ्चवक्त्र रस १९७ | नागरादि क्वाथ ९५, ९८
लोकनाथ रस १९२ | उन्मत्त रस १९८ | ४६. तृष्णा रोग
( पित्तज ज्वर रोग ) | सन्निपाताञ्जन १९८ | गुडूच्यादिगण क्वाथ ९१
कट्फलादि क्वाथ ९४ | अवपीड नस्य २४६ | षडंग-पानीय १०५
पर्पटादि क्वाथ ९१ | विरेचन नस्य २४५ | लाजमण्ड १०७
द्राक्षादि क्वाथ ९१ | प्रबोधाञ्जन २८६ | बृहत् मधूकपुष्पादि फाण्ट १०८
पटोलादिगण क्वाथ ९२ | ( जीर्णज्वर रोग ) | आम्रादि फाण्ट १०८
लोकनाथ रस १९२ | गुडूच्यादि क्वाथ ९१, ९५, ९६ | यवसक्तु मन्थ १०९
( कफज ज्वर रोग ) | पञ्चमूलपक्व-क्षीर १०५ | मरिचादि हिम ११०
बीजपूरादि क्वाथ ९२ | अमृता हिम ११० | धान्यक हिम ११०
भूनिम्बादि क्वाथ ९२ | विरेचन २२५-२२९ | धान्यकादि हिम ११०
पटोलादिगण क्वाथ ९२ | ( विषमज्वर रोग ) | जीवनीयगण चूर्ण ११८
पञ्चमूलपक्व-क्षीर १०५ | तुलसी आदि का स्वरस ८६ | आमलक्यादि गुटिका १३१
क्षीरपाक-विधि १०५ | क्षुद्रादि क्वाथ ९४ | च्यवनप्राशावलेह १४०
लोकनाथ रस १९२ | मुस्तादि क्वाथ ९४ | कूष्माण्डावलेह १४१
( वातपित्तज्वर रोग ) | पटोलादि क्वाथ ९२, ९४, ९५, १०१, १०२ | निरूहण का प्रयोग २३८
पञ्चभद्र क्वाथ ९२ | रसोन कल्क ११२ | प्रतिमर्श नस्य २४७-२४८
बृहत् मधूकपुष्पादि फाण्ट १०८ | त्रिफलापिप्पली चूर्ण १२० | मधु गण्डूष २५६
नीलोत्पलादि हिम ११० | ( धातुगत ज्वर रोग ) | ४७. दाह रोग
( वातकफज्वर रोग ) | पिप्पली-मोदक १३३ | गुडूच्यादिगण क्वाथ ९१
क्षुद्रादि क्वाथ ९४ | पिप्पल्यादि घृत १४६ | हरीतक्यादि क्वाथ ९८
शालपर्ण्यादि क्वाथ ९१, ९६ | महापञ्चतिक्त घृत १४८ | न्यग्रोधादि क्वाथ ९९
आरग्वधादि क्वाथ ९२ | लाक्षादि तैल १५२ | बृहत् मधूकपुष्पादि फाण्ट १०८
पिप्पल्यादि क्वाथ ९३ | ज्वरारि रस १९१ | यवसक्तु मन्थ १०९
हिंग्वादि चूर्ण १२६ | ज्वरांकुश रस १९१ | ( अन्तर्दाह रोग )
( पित्तकफज्वर रोग ) | अभयादि मोदक २२७ | धान्यक हिम ११०
अमृताष्टक क्वाथ ९२ | निरूहण का प्रयोग २३८ | धान्यकादि हिम ११०
पटोलादिगण क्वाथ ९२ | अवपीड नस्य २४६ | जीवनीयगण चूर्ण ११८
वासादि क्वाथ ९६, १०२ | ( शीतज्वर रोग ) | ( हस्तपादांगदाह रोग )
( सन्निपातज ज्वर रोग ) | क्षुद्रादि क्वाथ ९४ | सितोपलादि चूर्ण १२७
क्षुद्रादि क्वाथ ९४ | शीतारि रस १९१ | ( उरोदाह रोग )
अभयादि क्वाथ ९३ | ( एकाहिक ज्वर रोग ) | कामदेव घृत १४७
शालपर्ण्यादि क्वाथ ९१, ९६ | पटोलादि क्वाथ ९२, ९४, १०१, १०२ | अभयादि मोदक २२७
पटोलादिगण क्वाथ ९२ | मधु गण्डूष २५६