शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharangadhara Samhita with Dipika Hindi Commentary
शार्ङ्गधराचार्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished356 पृष्ठ
पृष्ठ 147, कुल 356 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 147[बायाँ स्तम्भ]
चतुर्थोऽध्यायः] हिमनिर्माणदिकल्पना 111
[बायाँ स्तम्भ]
का 'हिम' रक्तपित्त, ज्वर, दाह, तृष्णा तथा मुखशोष को नष्ट
करता है।
वक्तव्य-शीतला रोग में शीतोपचार का महत्त्व होने के
कारण इसका समावेश हिम-प्रकरण में किया गया है। बहुत
लोग शीतलारोग में औषधोपचार नहीं करते, वे निम्न विधि
से शीतला का उपचार करें।
[दायाँ स्तम्भ]
शीतला-चिकित्सा-विविध प्रकार के मन्त्रों का जप,
इष्टदेवता के निमित्त हवन, यथाशक्ति दान, कल्याणकारक
मन्त्रों का उच्चारण, इष्टदेवता का षोडशोपचार से पूजन तथा
ब्राह्मण, गौ, शिव तथा ग (शीतला देवी) का पूजन-इन
उपायों से शीतला को शान्त करें।
इस प्रकार वैद्यरत्न पण्डित तारादत्त त्रिपाठी के पुत्र डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी विरचित दीपिका व्याख्या,
विशेष वक्तव्य आदि से संवलित शार्ङ्गधरसंहिता मध्यमखण्ड का चौथा अध्याय समाप्त।। 4 ।।
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