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शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 434, कुल 511 में से

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पृष्ठ 434

४३४ ] [ श्रीशारदा तिलक
अभ्यर्चन करके भक्ष्य भोज्य और फलों से समन्वित नैवेद्य का नित्य
निवेदन करके रात्रि के मध्य में बलि का अपहरण करे । इस प्रकार
से प्रयत होकर इक्कीस हजार जप करे और समाप्ति के दिन में रात्रि
में बकरा का हनन करके बलि का अपहरण करे । राजा इस तरह इसे
कराकर धनों के द्वारा साधक पुरुष को सन्तुष्ट करे । इस विधि से करने
पर वटुकेश परम सन्तुष्ट होकर तेज, बल, यश, पुत्रगण, कान्ति, लक्ष्मी
और निरोगता को प्रदान किया करते हैं ।५६-६२।
नश्यन्ति शत्रवः सर्वे वर्द्धन्ते बन्धुबान्धवाः ।
अवग्रहो न जायेत विषये तस्य भूपतेः ६३
जुहुयात्केवलैर्लोणैरयुतं स्तम्भनेच्छया ।
निगडादिविमोक्षाय प्रयोगोऽयमुदाहृतः ।६४
बचाचूर्णपलं जप्तं गव्येनाज्येन लोलितम् ।
विभज्य भक्षयेद्वन्ध्या मण्डलात्पुत्रकांक्षिणी ।६५
विनीतं पुत्रमाप्नोति मेधाऽऽरोग्यबलान्वितम् ।
आदावन्ते प्रयोगस्य वटुकाय बलि हरेत् ।६६
द्विविधो बलिराख्यातो राजसः सात्विको बुधैः ।
राजसो मांसरक्ताढन्नःपलत्रयसमन्वितः ।६७
उसके सभी शत्रुगण नष्ट हो जाया करते हैं और उसके बन्धु-
बान्धवों की वृद्धि होती है । उस राजा के देश में अवग्रह नहीं हुआ
करता है ।६२। यदि किसी के स्तम्भन करने की इच्छा हो तो केवल
लोण से दश सहस्र आहुतियां देनी चाहिये । बन्धन आदि के विमोक्षण
करने के लिये यह प्रयोग उदाहृत किया गया है ।६४। वच के चूर्ण को
गो के घृत में लोलित करके एक पल प्रमाण को अभिमन्त्रित करे । फिर
इसको विभक्त करके वन्ध्या नारी खावे । जो मण्डल से पुत्र की प्राप्ति
आकांक्षा रखने वाली होवे तो यह नारी परम विनीत पुत्र को
किया करती है, जो मेधा-आरोग्य और बल से अन्वित हुआ करता।
आदि में और अन्त में प्रयोग करने पर वटुक के लिये बलि का