शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 366, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें३६६ ] [ श्रीशारदा तिलक
ज्वलद्वयं प्रज्वलार्णान्विदेत् सर्वजनस्य च ।
हृदय मम शब्दान्ते वशंकुरुयुगं शिरः । १५१
अब मन्त्र बतलाया जाता है-षट्कोण के मध्य में कामबीज के
अन्दर साध्य-साधक कर्म का नाम लिखना चाहिए । अग्नेयादि
षट्कोणों में काम षडङ्गों को लिखे। उसके वाहिर अष्टदल के मध्य में
वक्ष्यमाण गायत्रीके वर्गोंको तीन बार लिखकर माला मन्त्र के षट्-षट्
अक्षरों को दलों के अग्रभागों में लिखना चाहिए। में न्यस्त मनो-
भाव से भूपुर को आवृत्त करे। यह जगन्मोहन यन्त्र कहा गया है
।१४८। काम गायत्री का उद्धार बतलाया जाता है-'कामदेवाय' के अन्त
में चतुर्थ्यन्त 'पुष्प वाण' लिखना चाहिए । फिर 'विदमहे'और 'धीमहि'
लिखकर अनङ्ग प्रचोदयात लिखे ।१४६। माला मन्त्र बतलाते हैं-
'कामदेवाय नमः' यह कहकर 'सर्व नमः सर्व प्रियाग जन मोहनाय'
लिखकर 'ज्वल' को दो वार और प्रज्वल वर्णों को कहे । फिर सर्व
जनस्य हृदय मम वश कुरु कुरु स्वाहा' कहे-यह माला मन्त्र अड़तालीस
अक्षरों से युक्त होता है । १५०-१५१।
मालामन्तुरयं साष्टचत्वारिंशद्भिरक्षरैः ।१५२
साध्याख्यापुटितः स्मरैः परिवृतं कामं लिखेन्मध्यतः ।
पश्चात्तारविकारपक्षकपरान्नासाधिझिण्टीशघान् ।
शूलाढ्याष्टदलेषु साधुविलखेत्ताम्बूलपत्रोदरे ।
यन्त्रं या निशि खादयेत्कृतजपं वश्या भवेत्तस्य सा ।१५३
कथित पुष्प बाणस्यसांगोपाँगसमर्चनम् ।
सौभाग्यकान्तिविभवदारपुत्रसमृद्धिदम् ।१५४
अब अन्य यन्त्र बतलाया जाता है-आठ दलों की कर्णिका
में मध्य में साध्य कर्म नाम से पुटित काम बीजों से परिवृत
करके लिखे । पीछे तार-विकार पक्षक पर नासार्धिझिण्टीशयों की
शूलाढ्य आठ दलों में भली भाँति लिखना चाहिए । फिर ताम्बूल के
मध्य में रखकर रात्री में खावे ओर जप करे तो वह उसके वश्य हो