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शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 286, कुल 511 में से

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पृष्ठ 286

२८६ ] [ श्रीशारदा तिलक
आज्याक्तदूर्वाहोमेन जीवेद्वर्षशतं नरः ।
अष्टोत्तरशतं नित्यं हविषा मृगमुद्रया । १३१
जुह्वन्नीजायते लक्ष्मीर्धनधान्यसमृद्धिदा ।
प्रतिमासं प्रतिपदि जुहुयादयुतं घृतैः ।१३२
श्रीर्भवेन्महती तत्र षण्मासादनपायिनी ।
दरुणैरुत्पलैः फुल्लैर्मधुरत्रयसंयुतैः ।१३३
जुहुयाद्वत्सराद्धं यः स भवेदिन्दिरापतिः ।
अरुणाब्जैस्त्रिमध्वक्तैर्जुहुयादन्वहं सुधीः ।१३४
सहस्रं वत्सराद्धेन भवेद्भूमिपुरन्दरः ।
वत्सरं जुह्वतस्तु स्याल्लक्ष्मीरिन्द्रेण वाञ्छिता ।१३५
जुहुयादमृताखण्डैः पयोक्तैः सप्तवासरम् ।
त्रिसहस्रं प्रतिदिनं मन्त्रविद्विजितेन्द्रियः ।१३६
कृत्याद्रोहज्वरोन्मादरोगान् जित्वा निरन्तरम् ।
जीवेद्वर्षशतं भूत्वा तेजसा भास्करोपमः ।१३७
करवीर जपाबिल्वपलाशनृपभूरुहाम् ।
प्रसूनैः कुमुदैः फुल्लैः कुरण्टैर्जातिसम्भवै ।१३८
पुष्पैर्हुत्वा त्रिमध्वक्तैमन्त्री प्रतिपदं प्रति ।
आप्नुयान्महतीं लक्ष्मीं वत्सराद्वाञ्छिताधिकाम् ।१३६
मानव आज्य से अक्त दूर्वा के होम से सौ वर्ष तक जीवित रहा
करता है । मृगमुद्रा से हवि के द्वारा नित्य ही एक सौ आठ आहुतियाँ
देवे तो धन धान्य की समृद्धि देने वाली लक्ष्मी हो जाती । प्रतिमास
में प्रतिपदा में घृत से दश हजार आहुतियाँ देवे ।१३१-१३२। इससे
छै मासों में बहुत बड़ी अनपायिनी श्री होती है । अरुण विकसित
उत्पलों से तीनों मधुरों में प्लुत करके जो होम करें तो उससे वह
आधे वर्ष में ही इन्दिरा का पति हो जाया करता है । तीन मधुरों में
अक्त अरुण उत्पलों से सुधी प्रतिदिन होम करे और एक सहस्र आहु-
तियाँ देवे तो वह आधे वर्ष से भूमिका इन्द्र हो जाया करता है । एक