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सर्वकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 28, कुल 511 में से

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२४ । प्रथम पटल
है। जो-जो भी लोक में नवात्मक है वह सब इसकीही उदञ्चित करता
है ।६१। शम्भु की भामिनी दश प्रकार से विकृत है जो भव के दुख
का हरण करने वाली हैं। गणपति का मन्त्र दश अक्षरों वाला है और
त्वरिता का दश अक्षरों वाला होता है ।६२। सरस्वती का मन्त्र दश
अक्षरों से युत है तथा यक्षिणी का दशाक्षर है। वासुदेवके स्वरूप वाला
मन्त्र और अश्वारूढ़ा का मन्त्र दशाक्षर होता है ।६३। त्रिपुरा दशकूट
है और त्रिपुरा का दश अक्षरों वाला है। नाम से पदमवती का मन्त्र
और रमा का मन्त्र दशाक्षर है ।६४। महेश्वरी तत्त्वरूपा हैं और शक्ति
के तत्वों का दशक होता है। क्रम से विष्णु के दश अवतार है और
नाड़ियोंका दशक होता है ।६५।
दशकं लोकपालानां यद्यदन्यत् सृजत्यसौ ।
एकादश क्रमात्संविद्गुणिता सा जगन्मयी ।६६
रुद्रैकादशनीमाद्याशक्तेरेकादशाक्षरम् ।
एकादशाक्षरं वाण्या रुद्रानेकादश क्रमात् ।६७
समुद्धरति सर्वात्मा गुणिता द्वादश क्रमात् ।
नित्यामन्त्रं महेशान्याः वासुदेवात्मकं मनुम् ।६८
राशीन् मासान् (भानून्) हरेर्मूर्तीर्यन्त्रं सा द्वादशात्मकम् ।
अन्यदेतादृशं सर्वं यत्तदस्यामजायत ।६६
लोकपालों का दशक होता है और यह जो जो भी अन्य का सृजन
करती है। वह जगन्मयी क्रम से गुणिता सम्वित् एकादश हैं ।६६। रुद्र
एकादश हैं और नीमादि शक्ति के एकादश अक्षर हैं। वाणी का मन्त्र
एकादश अक्षरों वाला है और क्रम से रुद्र एकादश होते हैं ।६७।
गुणिता सर्वात्मा क्रम से द्वादश समुद्धरण करती हैं। महेशानी का
नित्या मन्त्र-वासुदेव के स्वरूप वाला मन्त्र, राशियाँ—मांस—हरि की
मूर्तियाँ आदि द्वादशात्मक ही हैं। अन्य ऐसा सब जो है वह इससे
उत्पन्न हुआ है ।६८-६६।