शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 27, कुल 511 में से
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अष्टपीठं महादेव्या अष्टाष्टकसमन्वितम् ।
अष्टौ ताः प्रकृतोर्विघ्नान्वक्रतुण्डादिकान्क्रमात् ।८७
अणिमादिगुणांन्नागान् वह्नेमूर्तीयमादिकान् ।
अष्टात्मकं जगत्यन्यत्सर्वं वितनुते सदा ।८८
गुणिता नवधा नित्या सूते मन्त्रं नवात्मकम् ।
नवक शक्तितत्वानां तत्त्वरूपा महेश्वरी ।८६
नवकं पीठशक्तीनां शृङ्गारादीन् रसान्नव ।
माणिक्यादीनि रत्नानि नव वर्गयुतानि सा ।६०
देवी और देवों का हृदयङ्गम शुभ अष्ट गन्ध है । ब्रह्मागुणी आदि-
भैरव-सर्प मूर्त्तियाँ-दिशाएं और वसुगण अष्टाष्टक आदि से सम-
न्वित महादेवी के आठ पीठ है । घे प्रकृतियाँ आठ है—विघ्न क्रम से
व ऋ्रतुण्ड आदिक-आणिमादि—गण—नाग—वह्िनकी मूर्ति-यमा-
दिक अन्य सब जगत्में सदा विस्तार करते हैं सब अष्टात्मक ही है ।८६।
८७-८८। नित्या नौ प्रकार से गुणित नौ सख्य के स्वरूप वाले मन्त्र
को प्रसूत करती है । तत्त्व रूपा महेश्वरी शक्ति तत्त्वों का नवक करती
है ।८६। पीठ शक्तियाँ का नवक है और शृङ्गारादि रस नौ होते हैं ।
वह माणिक्य आदि रत्न भी जो वर्गों से युक्त है नौ ही है ।६०।
नवकं प्राणदूतीनां मण्डलं नवक शुभम् ।
यद्यन्नवात्मकं लोके सर्वमस्या उदञ्चति ।६१
दशधा विकृता शम्भोर्भामिनी भवदुःखहा ।
दशाक्षरं गणपतेस्त्वरिताया दशाक्षरम् ।६२
दशाक्षरं सरस्वत्या यक्षिण्याः सा दशाक्षरम् ।
वासुदेवात्मकं मन्त्रमश्वारुढा दशाक्षरम् । ६३
त्रिपुरा दशकूटं स्यात् त्रिपुराया दशाक्षरम् ।
नाम्ना पद्मावतीमन्त्रं रमामन्त्रं दशाक्षरम् ।६४
दशकं शक्तितत्त्वानां तत्त्वरूपा महेश्वरी ।
नाडीनां दशकं विष्णोरवतारान् दशा क्रमात् ।६५
प्राणदूतियों का नवक है और परम शुभ मण्डल का नवक होता