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शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 276, कुल 511 में से

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पृष्ठ 276

२७६ ] [ श्रीशारदा तिलक
सदृश अपनी कान्ति वाले-कर कमलों के द्वारा चारु खटाङ्ग, दो पद्म,
चक्र, शक्ति पाश, सृणि, अतीव रुचिर अक्षों की माला-कपाल को धारण
करते हुए तीन नेत्रों से शोभित चार मुखों से अभिराम-वल्लभाधं
फणि मयमुकुट से अन्वित तथा हार से देदीप्यमान भानु का हम भजन
करते हैं ।७१। मंत्र को धारण करने वाला पुरुष इस बिम्बपुटीकृत बीज
का तीन लाख जप करे । मधुर में उक्षित विकसित कमलों के द्वारा
जप का दशांश होम करे । दीप्ता आदि से से युक्त पीठ में कर्णिका में
उषादि का पूर्व आदि दिशाओं में भली भाँति अर्चन करके मूल मंत्र से
मूत्ति की कल्पना करनी चाहिए ।७२-७३।
आवाह्य पूजयेद्देवं वक्ष्यमाणविधानतः ।
सूर्यादींश्चतुरोदिक्षु विदिक्ष्वन्यं समर्चयेत् ।७४
अङ्गपूजा यथापूर्वं नेत्रमीशानदिग्गतम् ।
ग्रहानष्टौ ततो बाह्ये लोकपालांस्ततः परम् ।७५
अर्घप्रधानं प्रजपेन्मन्त्री मार्त्तण्डभैरवम् ।
इतिसिद्धमनुमन्त्री साधयेदिष्टमात्मनः ।७६
शाल्याज्यतिलबिल्वानां लक्षहोमाद्भवेन्निधिः ।
राजवृक्षसमुद्भूतैः पुष्पैर्होमोरमाकरः ।७७
जपाकुसुमहोमेन वशयत्यचिरात्नृपान् ।
मातुलिङ्गफलैर्हुत्वा धनमिष्टं लभेत सः ।७८
आवाहन करके आगे कहे गये विधानसे देव का यजन करे । चारों
दिशाओंमें सूर्यादिक का तथा विदिशाओंमें अन्य का समर्चन करे ।७४।
पूर्व की तरह अङ्गार्चन करे और ईशान दिशा में स्थित नेत्र का फिर
बाह्य में आठ ग्रहों का और उनके आगे लोक पालों का पूजन करे ।
मंत्रधारी अर्धप्रधान मार्त्तण्ड भैरव का जप करे । इस प्रकार से मंत्र
की सिद्धि करनेवाला मंत्रधारी अपने अभीप्सितका साधनकरे ।७५-७६।
शाली-आज्य (घृत) तिलों की तथा विल्वों की एक लाख आहुतियों के
देने से निधि हो जाया करती है । राज वृक्ष के समुद्भूत पुष्पों से किया