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सर्वकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 224, कुल 511 में से

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पृष्ठ 224

२२४ ] [ श्री शारदा तिलक
करके आत्मा का स्पर्श करके मन्त्र का जप करे तो उसको ग्रह छोड़
दिया करता है ।५६
सर्पाखुवृश्चिकादीनां विषमाशु विनाशयेत् ।
मनुनानेन विध्वन्मन्त्रविद्देवताधिया ॥५७
मन्त्रेणाऽनेन सञ्जप्तान्बाणानादाय साधकः ।
विमुञ्चेत्प्रतिसेनायां सा द्रुत विद्रुता भवेत् ।५८
शूलपाशधरां देवीं ध्यात्वात्मानमनाकुलः ।
प्रविशेद्युद्धदेश यो जित्वाऽऽयाति स निर्व्रणः ।५६
जुहुयात्तिलसिद्धार्थलमेकं यथाविधि ।
नामयुक्तं जपेन्मन्त्रं यस्यासौ मृत्युमेष्यति ।६०
गुटिका गोमयोत्पन्ना हुत्वाऽष्टशतसंख्यया ।
सप्ताहात्कुरुते मन्त्री विद्वेष स्निग्धयोर्मिथः ।६१
गृहीत्वा गोमयं व्योम्नि त्रिसहस्रं जपेत्ततः ।
गमिष्यतां द्वारदेशे निखातं स्तम्भनं भवेत् ।६२
बहुनोक्तेन किंसर्वं साधयेन्मनुनाऽमुना ।
उत्तिष्ठ पदमाभाष्य पुरुषि स्यात्पदं ततः ।६३
सर्प, चूहा, विच्छू आदि के विषको शीघ्र ही विनष्ट कर देता है।
मन्त्र का ज्ञाता पुरुष इस मन्त्र के द्वारा देवता की बुद्धि से प्रयोग करे
तो विषों की शान्ति होती है ।५७। इस मन्त्र के द्वारा भली भाँति जप
किये हुए बाणों को साधक लेकर अपने शत्रु की सेना में यदि उनको
छोड़े तो वह सेना बहुत शीघ्र ही भाग जाया करती है ।५८। अनाकुल
होकर शूल और पाश को धारण करने वाली देवी का आत्मा में ध्यान
करके जो कोई भी यदि युद्ध देश में प्रवेश करे तो वह व्रण रहित होता
हुआ ही उसको जीत करके आता है ।५६। विधिके अनुसार एक लाख मंत्र
का जप करके तिल और सिद्धार्थोंसे होम करे और नाम से युक्त मन्त्र
का जप करें जिसका नाम रक्खे वह मृत्युको प्राप्त हो जाता है । गोमय
से उत्पन्न गुटिकाओं की एक सौ आठ बार आहुतियाँ देवें तो मन्त्रधारी