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शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 196, कुल 511 में से

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पृष्ठ 196

१६६ ] [ श्री शारदा तिलक
अन्तरालों में निधियों का न्यास करे। मुख में मूल का और फिर इनके
स्तनों का न्यास करे। कर्णों के मूल में-दोनों स्तनों में-वाम कंधे में हृदय
म्बुज में सव्यअंस, दोनों पार्श्वभाग में-नाभिदेश में देशिक न्यास करे।
मान, अंस, पार्श्व, जठर, पार्श्वा सापर हृदय में जिसके लक्षण कथित
है, उन ब्राह्मणी आदि का विधिपूर्वक न्यास करना चाहिए। मूलमन्त्र
से देह में व्यापक न्यास करके फिर देवी का ध्यान करना चाहिए।१०
।१३। ध्यान बतलाया जाता है—उदीयमान दिन की द्युति से युक्त--
चन्द्र के किरीट वाली—उन्नत स्तनों से संयुत—तीन नेत्रों वाली—
स्मित सहित मुख से समन्वित—वरदान—पाश—अभय को करकमलों
में धारण करने वाली भुवनेश्वरी का भजन करे।१४।
प्रजपेन्मन्त्रविन्मन्त्रं द्वात्रिंशल्लक्षमानतः।
त्रिस्वाद्वक्तैः प्रजुहुयादष्टद्रव्यैर्दशांशतः।१५
दद्यादर्घ्यं दिनेशाय तत्र संचिन्त्य पार्वतीम्।
पद्मसमष्टदलं बाह्येवृत षोडशभिर्दलैः।१६
विलिखेत्कर्णिकामध्ये षट्कोणमतिसुन्दरम्।
ततः संपूजयेत्पीठं नवशक्तिसमन्वितम्।१७
जयाख्या विजया पश्चादजिता चापराजिता।
नित्या विलासिनी दोग्ध्री अघोरा मङ्गला नव।१८
बीजाद्यमासनं दत्त्वा मूर्ति तेनैव (मूलेन) पूजयेत्।
तस्यां संपूजयेद्देवीमावाह्यावरणैः सह।१९
मन्त्र धारण करने वाले को बत्तीस लाख की संख्या में मन्त्र का
जप करना चाहिए। त्रिस्वादु से अक्त अष्ट द्रव्यों से दशांश हवन करे
।१५। वहाँ पर पार्वती का ध्यान करके दिनेश्वर के लिए अर्घ्य देवे।
सोलह दलों से वृत बाहिर में आठ दलों वाला पद्म लिखे। कर्णिका के
मध्य में अत्यन्त सुन्दर षट्कोण लिखे। वहाँ पर नौ शक्तियों से सम-
न्वित पीठ का भली-भाँति अर्चन करना चाहिए ।१६।१७। उन नौ
शक्तियों के नाम—जया—विजया—अजिता—अपराजिता नित्या—