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शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 178, कुल 511 में से

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पृष्ठ 178

१७८ ] [ श्री शारदा तिलक
बीच में सम्बद्ध रत्नों के द्वारा दृष्टि को मनोहर लगने वाले हैं ऐसे
अद्भूत और चित्रों से परिपूर्ण है उन वितानों के द्वारा अतीव मनोहर
है !६८। सभी प्रकार के रत्नों से समाबद्ध-सुवर्ण के कुट्टिम वाला तथा
अति उज्ज्वल है । केतकी, मालती, जाती, चम्पा, उत्पल केसरों मे,
मल्लिका, तुलसी, जाती, नन्द्यावर्त्त, कदम्बो से, इन कथितों के द्वारा
तथा अन्य पुष्पों से महीतल अलंकृत है ।६६।७०।
अम्बुकाश्मीरकस्तूरीमृगनाभितमालकैः ।
चन्दनागुरुकर्पूरैरामोदितदितदिगन्तरम् ।७१
एव सञ्चन्त्य मनसा मण्डपं सुमनोहरम् ।
तन्मध्ये भावयेन्मन्त्रो पारिजातं मनोहरम् ।७२
तस्याधस्तात्स्मरेन्मन्ती रत्नसिंहासनं शुभम् ।
तस्मिन्सञ्चिन्तयेद्देवी महालक्ष्मीं मनोरमाम् ।७३
बालाक्रद्युतिमिन्दुखण्डविलहत्कोटीरहारोज्ज्वलाम् ।
रत्नाकल्पविभूषितां कुचनतां शालैः करैर्मञ्जरीम् ।
पद्मे कौस्तुभभरतनमध्यविरतं सम्बिभ्रतीं सुस्मिताम् ।
फुल्लाम्भोजविलोचनत्रययुतां ध्यायेत्परां देवताम् ।७४
सिञ्जन्मञ्जीरसंशोभिपादाम्भोजविराजिताम् ।
नवरत्नगणाकीर्णकाञ्चीदामविभूषिताम् ।७५
मुक्तामाणिक्यवैदूर्यसम्बद्धोदरबन्धनाम् ।
विभ्राजमानां मध्येन वलित्रितयशोभिताम् ।७६
जाह्नवीसरिदावर्तशोभिनाभिविभूषिताम् ।
पाटीरपङ्ककर्पूरकुङ्कुमालङ्कृतस्तनीम् ।७७
उस मण्डप के सभी दिशाओं में अम्बु काश्मीर (केशर) कस्तूरी,
मृगनाभि, तमाल, चन्दन, गूगल, कपूर से आमोद फैला हुआ था अर्थात्
सभी ओर परम सुगन्ध छायी हुई थी ।७१। उसके मध्य में मण्डप में
मन्त्रधारी व्यक्ति को परम मनोहर पारिजात की भावना करनी चाहिए ।
इसके पूर्व मन में अतीव सुन्दर का चिन्तन कर लेवे ।७२। उसके नीचे