शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
१७ आठवां भाग॥ १४५
बैठ वहां आई और इस भीड भाड को देख दिलमें तो नि-
हायॅत खुश हुई मगर ऊपर मनसे तबियत बिगाड़ नाक चढ़ा
कहने लगी बाबा हमको आज किस बलामें ला फँसाया
यहां तो बडा आलम जमा है शहर में रकूबत रही या नहीं।
साहूकार कहनेलगे यहसब आपके दर्शनकी अभिलाषा किये
डटे हुए हैं आप तशरीफ लाइये एक चौकी पर जो सबसे ऊंची
बिछी थी मृगछाला पर जोगिनजी को बिठाया सुन्दर खुशबूदार
फूलों का हार गलेमें पिन्हाया चँवर होनेलगे चारों तरफसे जैजै
कार होने लगी बाद खामोशी उनने अपना सितार छेडा औ-
यह गजल गाना शुरू किया।
गजल-जबसे हुआ दिल उस यारपर माइल मेरा।
रहता काबू में किसी वक्त नहीं दिल मेरा ॥
मिस्ले सीमाब उडा जाता है फुरकतसे तेरी।
तू जो आजाय ठहरजाय अभी दिल मेरा ॥
कूचए इश्कमें रक्खाहै कदम जिस दिनसे।
कौनहै दिलके सिवा रहिबर मंजिल मेरा ॥
याद कर कर के तेरी सूरत को मोहन।
मिस्लेमाही तडफताहै यह दिल बिस्मिल मेरा ॥
इस गजल के होते ही तमाम आलम मानिन्द बुत के होगया।
जिस तरह कोई जादू पढ़के इन्सान को अपने वशीभूत कर-
लेताहै उसी तरह कुल आलम इस गजल रूपी जुल्फ पेचां में
फंसकर खामोश होगया तब जोगनने एक भजन और गाया॥
भजन।
प्रीति कर काहू सुख न लह्यौ ॥
प्रीत पतंग करी दीपक सों अपनों प्राण दह्यौ ॥ प्रीत कर
७ किस्सा गाइतीन यारका।
काहू सुख न लह्यौ ॥ १ ॥ भँवरन प्रीत करी जलसुत
संपुट मुखहि गह्यौ ॥ प्रीत कर काहू सुख न लह्यौ ॥ २ ॥
सारंग प्रीत करी जु नादसों निकटहि वाण सह्यौ ॥ प्रीत
कर काहू सुख न लह्यौ ॥ ३ ॥ हम हू प्रीति करी मोहनसों
चलत न कछू कह्यौ ॥ प्रीति कर काहू सुख न लह्यौ ॥४॥
सूरदास जा दिनते बिछुरे नयनन नीर बह्यौ ॥ प्रीत० ॥५॥
बस इस भजन को सुनतेही चारों तरफ से वाह वाह
होनेलगी जोगिनजी अपना सितार बंद कर जाने की तयारी
करने लगीं लोगोंने इनकी बड़ी बीनती की और कहा अब
आप कहां जातीहो यह जगह आपही की है सब तरह का
आराम है जहां जी चाहे जबतक खुशीसे रहो हम सब लोग
आपकी सेवा में हाज़िर हैं।
यह वचन रईसों का सुनकर जोगिनने वहांका रहना पसंद
किया और एक क्यारी में आमके सघन वृक्षों के नीचे अपना
आसन जमादिया जब इसको तीन चार दिन बीते कि वाद-
शाहके सामने यह जिकर पेश हुआ कि गरीबपरवर रतनबाग
में एक जोगन जिसकी उमर बीस वरस की होगी आनकर ठ-
हरी है गाने में लासानी है तमाम शहर में उसके गानेकी शो-
हरत होचुकी है सरकार भी अगर गाना सुनेंगे हैरत अंगेज होंगे
यह सुन बादशाह ने फरमाया कि अच्छा आज शाम कोशा-
ही बाग में महफिल बनकर तयारहो और मयकुल इजलास-
अह्ल कारान हाज़िर हों जोगन का गाना कराया जाये यह बा-
त बादशाह की सुनकर वज़ीरोंने वैसाही किया तमाम शहर में
ये बात जाहिर होगई कि आज शाहीबाग में जोगनका गाना है
खलकत पहलेसेही जमां होगई थी वादशाह सलामत भी आ
ज़र्दा घोड़े की तस्वीर ये रंग असली है
जरदंग नुक़रा घोड़े की तस्वीर
ये रंग असली है
अफ़रख घोड़े की तस्वीर
मुश्की घोड़े की तस्वीर ये रंग असली है
सितारा पेशानी घोड़
सुरख़ घोड़े की तस्वीर
ये रंग असली है
अरबी
रान
(२)
अरजन घोड़े की तसवीर एक पैर का सफेद होना अर्जेल की
पहचान है और यह अशुभ है
स्याहवालदार घोड़े की
तसवीर
नोक्ते घोड़े की तस्वीर
(२)
फूलदार गोरे की तरवीर
सियाह ज़बान घोड़े की तस्वीर
ये अशुभ है
शिकाल घोड़े की तरवीर
जिस घोड़े का दाहिना हाथ और पांय बावां और दाहिना
हाथ पांव सफेद हो उसको शिकाल कहते हैं
पोपत घोड की
तरवीर
(७)
स्याह तालु घोड़े की तस्वीर
ये शुभ है
गजदंत घोड़े की तस्वीर
ये अशुभ है
दूसरे तालू की तस्वीर का निशान
शाखदार घोड़े की तस्वीर
गोहादार यानी लीद दान
घोड़े की तस्वीर
(६)
दनी घोड़े की तस्वीर
घनी घोड़े की तस्वीर
शुतरदंदा घोड़े की तस्वीर
ये ऐब है
अड़िया घोड़े की तस्वीर
अरबी घोड़े की तस्वीर
गल्गोजुम घोड़े की तस्वीर
शुतर दंदान घोड़े की तस्वीर
बाऊ कुहन घोड़े की तस्वीर
(७)
चकावल वाले घोड़े की तस्वीर
चकावल एक कल्लाहूकी के चारोतरफ होता है
अरवपर
हड्डे की तस्वीर
पिछले धड़की तस्वीर हड्डी की तस्वीर
पहचान की बनाई है एक तरफ हड्डी
नुकीली निकल आती है
काने की तस्वीर
पिछले धड़की
तस्वीर मोतड़े की
पहिचान
बेर हड्डी की तसवीर
चकादल घोड़े की तस्वीर
पुरतदाल घोड़े की त०
खुन के असर जहां से रुकता है फूल जाता है
अगर पांव में होतो उसको पुरतदाल कहते हैं
(८)
काँदमोंरी ये दोनों
तरफ होती है
येक अंगमोरी
फैले हुए कान वाले घोड़े की तस्वीर
अरगूटाल घोड़ा
सिंघके निशान दो होते हैं तीन कान या
इससे ज्यादा भी
रहरनुमा घोड़े की
तस्वीर
पुर्गया घोड़े की तस्वीर
चांद सूरततील की दोभंवरी
वाले घोड़े की
तस्वीर
एक भौरी कनपटी के नीचे गिलान
दुगनी भौंरी
सांपन भौंरी
सीने की
भौंरी
आदम मार
अगू भौंरी
इन भोरियों को अशुभ कहते हैं
१३५
देव मुनि गौरोदार घोड़े का निशान जामाक पों गिर
कटोली भौंरी
नाक की भौंरे
देव मुनि
सिंहन खूंटी
उरवाड़
भौंरी का निशान
स्याह गालू घोड़े की तस्वीर
फूलदार घोड़े की तस्वीर उसका हाथ सफेद हो
उसको हाथवरद कहते हैं
कुशादार घोड़े की तस्वीर
चकार घोड़े की तस्वीर
कपाती दुम्म घोड़े की तस्वीर
(४१)
यह मूरत फिर की देखो
उस तसबीर से १० मुकाम उल्टे भौंरियों के
मालूम होते हैं
जौनी भौंरी लगे ऐब दार
सीने की दोनों उलटी भौंरी
कुख की भौंरी ऐबदार
दोनों उलटी भौंरी
तरकादन घोड़े की तसबीर
घोड़ा सवार के अख्ति-
यार में नहीं होता
आंस्तारफोड़ा
गठाभौरी
दाव भयैतो
नंगभोर नोमका
चित्र देख पाठ
पान खांद
एक कनपटी का नागत
जिसका खुर
सवार का तरास है
खूंटाउखाड़ भोरी
सुजवल भौरी
सांपन का चिन्ह
हारदास्त
खुरौ उप्पाड
नवभोर भौरी
यह घोड़ा ब्राह्मण वर्ण है
शुभ है
यह घोड़ा क्षत्री वर्ण है यह युद्ध में
शुभ है
अथ शालिहोत्र प्रारम्भः
मंगलाचरणम् ।
❁ दोहा ❁
परब्रह्मको ध्यान करि, सब देवन सिर नाय ॥
शालिहोत्र वर्णन करूं, भाषा ललित बनाय ॥
प्रिय सजनो! परमात्मा ने अपनी सृष्टि में एक अद्भुत पशु जिसे
घोडा कहते हैं और वह बग्घी इक्का टमटम आदि सवारियों में
जोते जाते हैं इस घोडेसे संसार के अनेकों कार्य सिद्ध होते हैं
जैसे घोडेपर व्यापारी लोग नाज लादते हैं, यह सवारीके लिये
बहुत ही लाभदायक है घोडा चलने में तेज होताहै कहीं २ के
घोडे ऐसे वीर होते हैं जो अपने स्वामी का विपत्ति समय में
बडा काम करते हैं जैसे दरिया के अत्यन्त वेग में पार जाना कठिन
हो जाता है परन्तु घोडा ऐसा बहादुर होता है, जो मालिक को
पीठपर चढाकर पारकर देता है यहां तक कि यह चोर बदमाशों
से समय पड जानेपर बचा सक्ता हैक्योंकि घोडेकी दौडमें पकड-
ना मुश्किल हो जाता है इसलिये राजा महाराजा अमीर साहू-
कार आदि घोडेकी बड़ी कदर करते हैं किसी समय घोडा बी-
मार होजाता है तो बिना दवा के रोग से प्रायः मर जाते हैं इस
लिये इस पुस्तक में उनके लक्षण शुभ अशुभका वर्णन करके उ-
नकी चिकित्सा भलीभांति लिखी गई है जिससे घोडे सहज में
२ शालिहोत्रम् ।
चारोग्य होसकते हैं इसलिये घोडों के पालनेवाले महाशयों के
लाभार्थ यह पुस्तक अनेक ग्रंथोंसे संग्रहकी गई है. यह पुस्तक
प्रत्येक मनुष्यको लेकर रखना चाहिये और एकबार पढजाने से
भलीभांति ज्ञान होसकता है कि अमुक घोड़ोंके अमुक रोग हो-
गया है और अमुक औषधि का सेवन करना चाहिये.
भारतवर्ष में बहुत प्राचीन काल में शालिहोत्र नामक कोई
महान् अश्ववैद्य हुए थे, उनने इस विद्या में बडी पारदर्शिता
प्राप्त कीथी और इस विषयमें जो ग्रन्थ उन्होंने संस्कृत भाषामें
लिखा था वह उन्हीं के नाम से विख्यात होगया. अर्थात् अश्व-
विद्या पर अन्य महात्माओं के बनाये हुए ग्रन्थभी शालिहोत्र
कहलाने लगे ।
संस्कृतभाषा में घोडे चार प्रकार के लिखे हैं. यथाः-उत्तम,
मध्यम, अधम और अधमाधम ।
जिन घोडों के सिखाने में परिश्रम अधिक नहीं होता है, स-
हज में सीख लेते हैं; और जिनका स्वभाव भी नम्र होता है.
अपने स्वामी के मनोनुकूल काम करते हैं न चलनेमें अडते हैं;
न पीछे को हटते हैं, ऐसे उत्तम उत्तम लक्षणों से युक्त उत्तम होते
हैं, तथा इन लक्षणों से हीन होने पर उत्तरोत्तर मध्यम हैं अधम
और अधमाधम जाने जाते हैं ।
घोडों के रङ्ग-संस्कृत में घोडोंके रङ्ग सात प्रकारके लिखे हैं
जैसे:-सफेद, लाल, पीला, सारङ्ग, (विचित्रवर्ण) कबुशी,नील
और कृष्ण । इनमें से सफेद रङ्ग का घोडा सबसे उत्तम होता
है सर्वाङ्गश्वेत घोडा राजाओं के लिये प्रशस्त होता है !
सफेद रंग बर्फ के ढेले के सदृश होता है, लालवर्ण कुंकुम के