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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 77

५८ शालिहोत्र ।
पाव, काली मिरच आधपाव गूगल डेढ़ तोला इनको पानी में
पीस कर गरम करके लेप करे ।
पानी की दवा-कच्छ, मुसब्बर, पीपल प्रत्येक आधपाव; शहद
एक सेर इनमें से हर एक दवा को अलग २ पीसकर शहद में
मिलावे और डेढ़ डेढ़ तोले की गोलियां बना कर उनमें से
प्रतिदिन दो दो गोली दाने के साथ खिलावे ।
पीठ को सूजन का इलाज-गेहूं की मैदा, हल्दी; सज्जी इन
सब को महीन पीस कर अग्नि पर पकाकर लेप करे ।
पीठके घावका हलाज-चार जामा के ढीला कसने से रिगड़
खाकर वा और किसी रीतिसे छिलकर पीठमें घाव होजाताहै ।
पहिली दवा-पुरानी गच का चूना और कड़वा तेल दोनों
दो सेर पानी में घोल कर रखदे, जब पानी ऊपर रह जाय
और तेल चूना नीचे बैठ जाय तब उसे निकाल घाव में भरे
और मक्खी न बैठने दे ।
दूसरी दवा-ऊँट की पसली की राख भरदे ।
तीसरी दवा-पुराने जूते की राख करके घावमें भरदे अथवा
[इस राख को कडवे तेल या मिट्टीके तेलमें मिलाकर लेप करे ।
चौथी दवा-प्रथमही चिकनी मिट्टी लगाकर साबुनके पानी से
दो दिन तक धोकर सरसोंका तेल और नील मिलाकर लगादे ।
घाव को नीमके पानीसे धोते रहनाभी अधिक गुणकारक है ।
तङ्ग के नीचे घाव होजाने का उपाय ।
जो पेटपर तङ्ग के नीचे घाव होजाय तो सादे कागज की
कई तह करके पानी में अच्छी तरह भिगोकर घाव पर रखदे
ऊपर से तङ्ग कसदे ।