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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 109

६० शालिहोत्रम् ।
दूसरी दवा-जङ्गली प्याज छदाम भर, हिंगडा पैसाभर और
अफीम छदामभर इन सबको मिलाकर एक गोली बनावे और
प्रतिदिन रात को एक गोली खिलावे ।
तीसरी दवा-गन्धक दो पैसाभर, हींग आधी छटांक, मुलहटी
का चूर्ण आधी छटांक, और तारपिन का तेल आधी छटांक,
इन सबको मिलाकर चार गोली बनावे और प्रतिदिन रात को
एक गोली खिलावे ।
चौथी दवा-मुलहटी का चूर्ण दो पैसाभर, जौ का चून आधी
छटांक और कोलतार छदाम भर इनमें थोड़ा शहद मिलाकर
एक गोली बनावे और ऐसी ऐसी एक गोली प्रतिदिन रात के
समय दे ।
कंवल रोग का वर्णन-उस रोग में घोडे के नेत्र पीले पड
जाते हैं, मूत्रका रङ्ग पीला तथा गाढा हो जाता है, दाना खाने
से घोडे को अरुचि होजाती है दस्त साफ नहीं होता है और
कभी २ बन्द हो जाता है ।
जो दस्त साफ न होता हो तब यह दवा करे:-
पहिली दवा-कैलोम्यल एक ड्राम, सुर्मा दुकराभर और मुस-
ब्वर धेलाभर सबको शीरा में मिलाकर एक गोली बनावे ।
चार २ पांच पांच घण्टे के पीछे ऐसी ऐसी एक एक गोली
जबतक दस्त न हो तबतक दे ।
दूसरी दवा-मुसब्बर धेलाभर और कोलोम्यल एक ड्राम इनको
शीरा में मिलाकर एक गोली बनाले और ऐसी ऐसी दो गोली
दिनभर में दो बार खिलावे ।