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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 107

८८ शालिहोत्रम् ।
बनावै और प्रतिदिन एक गोली प्रातःकाल खिलावे रातिव
खाने को न दे गर्म पानी पिलावै जो दस्त आने में देरी हो तो
तहिलास खिलावै और जो बहुत दस्त आवै तो ठण्डे पानी से
सोंठ की गोली बांधकर खिलावै और ऊपर से एक नीबू
खिलादे ।
ज्वरों का वर्णन- ज्वर में शरीर गरम होजाता है, घोडा सुस्त
रहता है , न कुछ खाता है और न कुछ पीता है, मूत्र कारंग
बदल जाता है । ज्वर में सब से पहिले जुलाव दे ।
पहिली दवा- टारटार एमटिक आधा ड्राम, कपूर आधा
ड्राम और शोरा दो ड्राम उदमें थोडी सी अलसी की खली
और शीरा मिलाकर गोली बनाले और दिन में दो बार
खिलावै ।
दूसरी दवा-कपूर और सुर्मा प्रत्येक अधेलाभर और शोरा
तीन पैसाभर इनमें शीरा और मैदा या आटा मिलाकर गोली
बनाले । प्रति दिन एक या दो गोली खिलावै ।
तीसरी दवौ-सुर्मा आधा पैसा भर, सीरा डेढ पैसा भर और
काला नमक एक पैसा भरले इनमें थोडा शहद मिलाकर
गोली बनाले और प्रतिदिन दो बार घोडे को खिलावै । यह
इनफूंएंजा नामक ( शीत ) ज्वर पर बहुत लाभदायक है ।
सन्निपातज ज्वर-यह ज्वर घोडेको अचानक उत्पन्न होजाता है
और यदि हसका उपाय शीघ्रही न किया जाय तो घोडा मर
जाता है । इस ज्वर में घोडे की नाडी तेज चलती है, नाक के
भीतर सुखीसी दिखलाई देती है सामने की टांगे तनी हुई सी