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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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शालिहोत्र । ८१
जिनसे पीला पानी झरता है इससे दाग देने से बहुत फायदा
होता है । तथा सिंगरफ़ की गोली प्रातःकाल खिलावे और
मरहम कर लगावे ।
सुम के रोगों का इलाज-जो घोडे की नाल गिर गई हो तो
उसे अपने थान से न खोले और जो नालबन्दी में देर होजाय
और सुम घिसते छिनते बदसूरत हो जाय तो नीचेके मरहम
लगाने से अच्छा होता है ।
मरहम नं०१-मोम, अलसी का तेल, शूकर का तेल, बकरे
की चर्बी तारपीन का तेल और शहद सब चीजों को बराबर
ले और पहिली चार चीजों को पिघला कर आग पर से उतार
ले और फिर तारपीनका तेल तथा शहद मिलादे जबतक ठण्डा
न हो और कभी २ यह मरहम कज्जल मिलाकर काला कर
लेते हैं ।
मरहम नं०२-चर्बी दो सेर, मोम आध पाव और पत्थर के
कोयले का तेल पावभर इन तीनों चीजोंको धीमी (मन्द मन्द)
आग पर पिघलाकर और चलाकर मरहम बनाले, अगर खता
या घाव में भरना हो तो थोडा सा पीव और मिलादे ।
ये दोनों नुसखे अंग्रेजी शालिहोत्रों के हैं ।
सुम फट गया हो उसका इलाज ।
अक्सर पत्थर और बालु के ऊपर चलने से सुम फट जाता है
तब उस हालतमें यह दवा करे:-मोम आधपाव, धूप एक छटांक
तारपीन का तेल आधी छटांक और चर्बी डेढ पैसाभर इन सब
चीजों का मरहम बनाकर सुमके घाव में भरदे और घोडे को