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सर्वकोश
सेहत संजीवनी

सेहत संजीवनी

Sehat Sanjivani

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (उद्गम)

DevanagariHindipublished104 पृष्ठ

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साहिब बन्दगी

आरती

जय सदगुरु देवा, साहिब जय सदगुरु देवा,
सब कुछ तुम पर अर्पण करहूँ पद सेवा।

जय गुरुदेव दया निधि, दीनन हितकारी, साहिब भक्तन हितकारी,
जय जय मोह विनाशक, जय जय तिमिर विनाशक, भय भंजन हारी।

साहिब जय.....

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, गुरु मूर्ति धारी, साहिब प्रभु मूर्ति धारी,
वेद पुराण बखानत, शास्त्र पुराण बखानत, गुरु महिमा भारी।

साहिब जय.....

जप तप तीर्थ संयम, दान विधि दीन्हे, साहिब दान बहुत दीन्हे,
गुरु बिन ज्ञान न होवे, दाता बिन ज्ञान न होवे, कोटि यत्न कीन्हे।

साहिब जय.....

माया मोह नदी जल, जीव बहे सारे, साहिब जीव बहे सारे,
नाम जहाज बिठाकर, शब्द जहाज चढ़ाकर, गुरु पल में तारे।

साहिब जय.....

काम क्रोध, मद, लोभ, चोर बड़े भारी, साहिब चोर बहुत भारी,
ज्ञान खड्ग दे कर में, शब्द खड्ग देकर में, गुरु सब संहारे।

साहिब जय.....

नाना पंथ जगत में निज-निज गुण गावें, साहिब न्यारे-न्यारे यश गावें,
सब का सार बताकर, सब का भेद लखा कर, गुरु मार्ग लावें।

साहिब जय.....

गुरु चरणामृत निर्मल, सब पातक हारी, साहिब सब दोषक हारी,
वचन सुनत तम नासे, शब्द सुनत भ्रम नासे, सब संशय टारी।

साहिब जय.....

तन, मन, धन सब अर्पण, गुरु चरण कीजै, साहिब दाता अर्पण कीजै,
सदगुरु देव परमपद, सदगुरु देव अचलपद, मोक्ष गती लीजै।

साहिब जय.....