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सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary

जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

शुद्धि पत्र
पृष्ठ पंक्ति अशुद्धि शुद्धि
६ १६ साधनौपाय साधनोपाय
०. १९ युद्ध शुद्ध
१६ १२ के में
” २० शान्ता शान्तो
१८ ४ संक्या संख्या
२३ ११ बहिद्रष्टि बहिर्दृष्टि
३० ८ उच्छ्श्वास उच्छ्वास
३० ११ दु. स. दु. श.
३९ १०, १३ हो जायगी लग जायगी
३९ अन्तिम ऐ स्वरात्मक ऐ उसका स्वरात्मक
४० १७ शांतातीता शांत्यातीता
४४ १७ सृस्ट्रत्व सृष्टृत्व
५९ ११ गायत्री का भी गायत्री का ही
६१ ३ शक्ति अनन्तता शक्ति की अनन्तता
” ४ शैरि शौरि
६६ ९ संमार संसार
७२ १८ शाक्षात् साक्षात्

[ २ ]
७४ १४ निम्नोद्धत निम्नोद्धृत
७५ २ वराभित्यभिनया वराभीत्यभिनया
८३ ६ शक्त शक्ति
,, १३ नाया माया
८९ ६, ७ तमोगु रजोगु तमोगुण रजोगुण
,, अन्तिम रजित रंजित
१०० ७, ८ रुद्रग्रंथि के स्थान पर ब्रह्मग्रंथि और ब्रह्मग्रंथि
के स्थान पर रुद्रग्रंथि पढ़ें
१०६ ६ जसे जैसे
११९ ७ शा. नि. शा. ति.
१३२ १५ हरमहिशि हरमहिषि
१३३ ५ हराधींगिनी हरार्धांगिनी
१३४ १३ सूर्या: सूर्य:

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