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सर्वकोश
सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary

जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

पृष्ठ 9, कुल 415 में से

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पृष्ठ 9

श्रीमच्छंकर भगवत्पादकी जीवन झांकी
और
सौन्दर्य लहरी ।
अद्वैत स्थापनाचार्यं शंकरं लोक सद्गुरुम्
प्रस्थान त्रय भाष्यादि ग्रंथकारं नमास्यहम्
अहं ब्रह्मस्वरुपिणो, मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत् शून्यं
चाशून्यच ।
श्रीमद्भगवत्पाद जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने सौन्दर्यलहरी
स्तोत्र में श्री आदि शक्ति मूलमाया एवं शुद्ध विद्या का तात्विक,
यौगिक, और प्राकृतिक सगुणरुप का, रसगर्भित, भक्तिपूर्ण, व मनोहर
वर्णन किया है। भगवत्पाद ने जो अनेक ग्रंथ तात्विक और धार्मिक
विषय के लिखे हैं, उनमें 'सौन्दर्यलहरी' एक संकीर्ण स्तोत्र है,
जिस की रचना भगवत्पादने बाल्यावस्था में ही की थी, ऐसा श्लोक
७५ और १०० से प्रकट होता है। श्रीशंकराचार्य का जन्मकाल
इतिहास संशोधन कर्ता डा. भाण्डारकर, जस्टिस तैलंग, लो. तिलक,
हाईकोर्ट वकील नारायण शास्त्री (age of shankar के
लेखक), लो. का. बा. पाठक व म. रा. बोडस M. A. L L B
प्रभृति विद्वद्मण्डली ने ७८८ ई. में केरल देशके कालडी ग्राम में
वैशाक शु. १० मी को निश्चित किया है। इन की माता का नाम
आर्य्यंअंबा, पिता का नाम शिवगुरु और 'आजा का नाम