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सर्वकोश
सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary

जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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पृष्ठ 224

१७४ सौन्दर्य लहरी
इनमें उक्त शक्तियों की उपासना है। (२०) ब्रह्म यामल, (२१)
विष्णु यामल, (२२) रुद्र यामल, (२३) लक्ष्मी यामल, (२४)
उमा यामल, (२५) स्कन्द यामल, (२६) गणेश यामल. (२७)
जयद्रथ यामल, ये आठ काम सिद्ध यामल तंत्र हैं। (२८) चंद्र-
ज्ञान (२९) मालिनी विद्या-समुद्रों को पार करने की विद्या, (३०)
महासंमोहन, (३१) वामजुष्ठ, (३२) महादेव, (३३) वातुल,
(३४) वातुलोत्तर, (३५) कामिक, (३६) हृद्भेद तंत्र, वामाचार
द्वारा षड्‌चक्रवेध, (३७) तन्त भेद, (३८) गुह्य तंत्र, (३९) कला-
वाद, (४०) कलासार, (४१) कुंडिका मंत, (४२) मतोत्तर, पारद
विज्ञान का तंत्र, (४३) वीणाख्य-यक्षिणी का तंत्र, (४४) त्रोतल,
जादू तावीज इत्यादिका तंत्र, (४५) त्रोतलोत्तर-६४ हजार यक्षिणियों
को आवाहन करने की विद्या । (४६) पंचामृत-आयुदीर्घ करने का
विज्ञान, (४७) रूपभेद, (४८) भूतोड्डामर (४९) कुलसार, (५०)
कुलोड्डीश, (५१) कुलचूडामणि, इन सब में मारण उच्चाटन प्रयोग
हैं। (५२) सर्वज्ञानोत्तर, (५३) महा कालीमत, (५४) अरूणेश,
(५५) मोदिनी ईशा, (५६) विकुण्ठेश्वर-ये ५ तंत्र दिगंवरों के
हैं। (५७) पूर्व आम्नाय, (५८) पश्चिम आम्नाय, (५९) दक्षिण
आम्नाय, (६०) उत्तर आम्नाय, (६१) निरुत्तर आम्नाय, (६२)
विमल, (६३) विमलोत्तर, और (६४) देवीमत, ये क्षपणकों के तंत्र
हैं। यह नामावली वामकेश्वर तंत्र में है। भास्करराय के मतानुसार
४ से ११ तक भैरवाष्टक को एक ही तंत्र माना गया है, और
(३१, ३२) वामजुष्ठ और महादेव दोनों को एक तंत्र माना गया
है इसलिये नीचे दिये हुए आठ और तंत्रों सहित ६४ की संख्या
पूरी की जाती है। उनके नाम ये हैं (१) महालक्ष्मी मत, (२)