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सर्वकोश
सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)

सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)

Saundarananda Mahakavya of Ashvaghosha

महाकवि अश्वघोष (व्याख्याकार: आचार्य जगदीशचन्द्र मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished496 पृष्ठ

पृष्ठ 8, कुल 496 में से

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पृष्ठ 8

( २ )
अतिरिक्त 'लाहा द्वारा लिखित 'अश्वघोष' शीर्षक पुस्तक तथा श्रीमूर्यनारायण
चौधरी द्वारा लिखित अनुवाद से भी मदद ली है। म० महोपाध्याय हरप्रसाद
शास्त्री की रचना से भी मैंने सहायता ली है। इनके अतिरिक्त मैं उन विद्वानों,
विचक्षणों और देश-विदेश के ग्रन्थकारों का हृदय से आभार स्वीकार करता
हूँ, जिनसे मुझे प्रेरणा मिली, आपेक्षिक सहयोग मिला, आशीर्वाद मिला, यथा-
वसर सहायक सामग्रियां उपलब्ध कराई गई और यथावसर बौद्ध-पारिभाषिक
दुरूह शब्दों का अर्थ भी बतलाया गया। लेखन-अवधि में कुछ विशिष्ट
विशेषज्ञों का स्नेह, सहयोग एवं निरन्तर मार्गदर्शन मिलता रहा।
चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन ने संस्कृत वाङ्मय का महान् उपकार किया
है। इस ग्रन्थ के सम्पादन में अपनी रुग्णता, वार्द्धक्य और कार्य-व्यस्ततावश
हुए विलम्ब के लिए मैं अपने को दोषी मानते हुए सुरभारती के संस्थापक गुप्त-
बन्धुओं का आभार स्वीकार करता हूँ।
वार्द्धक्यजन्य शिथिलता, दृष्टिक्षीणता, अज्ञान, असावधानी या मुद्रणादि
के कारण इस पुस्तक में जो त्रुटियां रह गई हों और उनकी सूचना सुधी
समीक्षकों एवं विज्ञ पाठकों से मुझे प्राप्त हुई तो मैं उनका आभार स्वीकार
करते हुए अगले संस्करण में उसे सुधारने का प्रयत्न करूँगा।
'सरस्वती सदन' विनयावनत—
प्रोफेसर्स कॉलोनी जगदीशचन्द्र मिश्र
पो० रिफाईनरी टाउनशिप
बेगूसराय, पिन० ८५१११७
माघीपूर्णिमा, संवत् २०४६ ।