सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)
Saundarananda Mahakavya of Ashvaghosha
महाकवि अश्वघोष (व्याख्याकार: आचार्य जगदीशचन्द्र मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 471, कुल 496 में से
संदर्भ में पढ़ेंनामानुक्रमणी ४१७
सूर्य्य—दिवाकर । ( ७।२६ )
सेनजित्—एक पराक्रमी पुरुष । ( ८।४४ )
सेनाक—एक विजयी राजा । ( ७।४३ )
सेनापति—देवराज इन्द्र । ( ७।४३ )
सोमवर्मा—उर्वशी के पति । ( ७।४२ )
सौन्नन्दकी—परशुराम । ( ७।४२ )
स्थूलशिरा—एक कामासक्त व्यक्ति । ( ७।३६ ),
स्वभाव—प्रवृत्ति का कारण । ( २६।१७ )
स्वागत—बौद्ध भिक्षु । ( १६।८९ )
स्वाहा—सभी देवताओं को बिना किसी विचार के आहूति देने वाली अग्नि-
पत्नी । ( ७।२५ )
हरि—श्रीकृष्ण । ( ९।१८ )
हिमगिरि—हिमालय पर्वत । ( १।४३ )
हिमवान्—हिन्दुस्तान की उत्तरी सीमा पर स्थित प्रसिद्ध हिमालय पहाड़ ।
( १।५, ३७; २।६२; १०।५, ११; १५।२८ )
हिरण्यरेता—अग्नि एवं कामासक्त । ( ७।२५ )
हैहय—क्षत्रियों का एक वंशविशेष, एक देश और उसके अधिवासी तथा यदु के
प्रपौत्र का नाम, अर्जुन कार्त्तवीर्य । ( ८।४५ )
────────