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सर्वकोश
संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 72

६८ संस्कारविधिः
इन नव मन्त्रों का जप करे। इसी प्रकार बाएँ कान पर
मुख धर ये ही नव मन्त्र पुनः जपे।
इसके पीछे बालक के कन्धों पर कोमल स्पर्श से, अर्थात्
बालक के स्कन्धों पर हाथ का बोझ न पड़े, इस प्रकार हाथ
धरके निम्नलिखित मन्त्र बोले—
ओम् इन्द्र॒ श्रेष्ठा॑नि॒ द्रवि॑णानि धेहि॒ चित्तिं॒ दक्ष॑स्य
सुभ॒गत्वम॒स्मे। पोषं॑ रयी॒णामरि॑ष्टिं तनू॒नां स्वा॒द्मानं॑ वा॒चः
सु॑दि॒नत्वमह्ना॑म्॥ १ ॥
अ॒स्मे प्र य॑न्धि मघवन्नृजीषि॒न्निन्द्र॑ रा॒यो वि॒श्ववा॑रस्य॒ भूरैः।
अ॒स्मे श॒तं श॒रदो॑ जी॒वसे॑ धा अ॒स्मे वी॒राञ्छश्व॑त इन्द्र
शिप्रिन्॥ २ ॥
ओम् अश्मा भव परशुर्भव हिरण्यमस्तृतं भव।
वेदो वै पुत्र नामासि स जीव शरदः शतम्॥ ३॥
इन तीन मन्त्रों को बोले। तत्पश्चात्—
ओं त्र्या॒यु॒षं ज॒मद॑ग्नेः क॒श्यप॑स्य त्र्यायु॒षम्।
यद्दे॒वेषु॑ त्र्यायु॒षं तन्नो॑ऽअस्तु त्र्यायु॒षम्॥
इस मन्त्र का तीन बार जप करे।
तत्पश्चात् बालक के स्कन्धों पर से हाथ उठा ले और
जिस जगह पर बालक का जन्म हुआ हो वहाँ जाके—
ओं वेद ते भूमि हृदयं दिवि चन्द्रमसि श्रितम्।
वेदाहं तन्मां तद्विद्यात् पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः
शतँः शृणुयाम शरदः शतम्॥ १ ॥
इस मन्त्र का जप करे। तथा—