संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)
Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअन्त्येष्टिप्रकरणम् ३०५
य॒माय॒ मधु॑मत्तमं॒ राजे॑ ह॒व्यं जु॑होतन।
इ॒दं नम॒ ऋषि॑भ्यः पूर्व॒जेभ्यः॒ पूर्वे॑भ्यः पथि॒कृद्भ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ १६ ॥
—ऋ० म० १०। सू० १४॥
कृ॒ष्णः श्वे॒तौऽरु॑षो यामो अस्य ब्र॒ध्न ऋ॒ज्र उत॑ शो॒णो य॑श॒स्वान्।
हिर॑ण्यरूपं॒ जनि॑ता जजान॒ स्वाहा॑ ॥ १७ ॥
—ऋ० म० १०। सू० २०। मं० ९॥
इन ऋग्वेद के मन्त्रों से चारों जने सत्रह आज्याहुति देकर,
निम्नलिखित मन्त्रों से उसी प्रकार आहुति देवें—
प्रा॒णेभ्यः॒ सार्धि॑पति॒केभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ १ ॥
पृ॒थि॒व्यै स्वाहा॑ ॥ २ ॥ अ॒ग्नये॒ स्वाहा॑ ॥ ३ ॥
अ॒न्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑ ॥ ४ ॥ वा॒यवे॒ स्वाहा॑ ॥ ५ ॥
दि॒वे स्वाहा॑ ॥ ६ ॥ सूर्या॑य॒ स्वाहा॑ ॥ ७ ॥
दिग्भ्यः स्वाहा॑ ॥ ८ ॥ च॒न्द्राय॒ स्वाहा॑ ॥ ९ ॥
नक्ष॑त्रेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ १० ॥ अ॒द्भ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ ११ ॥
वरु॑णाय॒ स्वाहा॑ ॥ १२ ॥ ना॒भ्यै स्वाहा॑ ॥ १३ ॥
पू॒ताय॒ स्वाहा॑ ॥ १४ ॥ वा॒चे स्वाहा॑ ॥ १५ ॥
प्रा॒णाय॒ स्वाहा॑ ॥ १६ ॥ प्रा॒णाय॒ स्वाहा॑ ॥ १७ ॥
चक्षु॑षे स्वाहा॑ ॥ १८ ॥ चक्षु॑षे स्वाहा॑ ॥ १९ ॥
श्रोत्रा॑य॒ स्वाहा॑ ॥ २० ॥ श्रोत्रा॑य॒ स्वाहा॑ ॥ २१ ॥
लोम॑भ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ २२ ॥ लोम॑भ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ २३ ॥
त्व॒चे स्वाहा॑ ॥ २४ ॥ त्व॒चे स्वाहा॑ ॥ २५ ॥
लोहि॑ताय॒ स्वाहा॑ ॥ २६ ॥ लोहि॑ताय॒ स्वाहा॑ ॥ २७ ॥