संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)
Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
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ओमद्भ्यः स्वाहा ॥ २४ ॥
ओमोषधिवनस्पतिभ्यः स्वाहा ॥ २५ ॥
ओं रक्षोदेवजनेभ्यः स्वाहा ॥ २६ ॥
ओं गृह्याभ्यः स्वाहा ॥ २७ ॥
ओमवसानेभ्यः स्वाहा ॥ २८ ॥
ओमवसानपतिभ्यः स्वाहा ॥ २९ ॥
ओं सर्वभूतेभ्यः स्वाहा ॥ ३० ॥
ओं कामाय स्वाहा ॥ ३१ ॥
ओमन्तरिक्षाय स्वाहा ॥ ३२ ॥
ओं पृथिव्यै स्वाहा ॥ ३३ ॥
ओं दिवे स्वाहा ॥ ३४ ॥
ओं सूर्याय स्वाहा ॥ ३५ ॥
ओं चन्द्रमसे स्वाहा ॥ ३६ ॥
ओं नक्षत्रेभ्यः स्वाहा ॥ ३७ ॥
ओमिन्द्राय स्वाहा ॥ ३८ ॥
ओं बृहस्पतये स्वाहा ॥ ३९ ॥
ओं प्रजापतये स्वाहा ॥ ४० ॥ ओं ब्रह्मणे स्वाहा ॥ ४१ ॥
ओं देवेभ्यः स्वाहा ॥ ४२ ॥ ओं परमेष्ठिने स्वाहा ॥ ४३ ॥
ओं तद् ब्रह्म ॥ ४४ ॥ ओं तद्वायुः ॥ ४५ ॥
ओं तदात्मा ॥ ४६ ॥ ओं तत्सत्यम् ॥ ४७ ॥
ओं तत्सर्वम् ॥ ४८ ॥ ओं तत्पुरोर्नमः ॥ ४९ ॥
अन्तश्चरति भूतेषु गुहायां विश्वमूर्तिषु। त्वं यज्ञस्त्वं
वषट्कारस्त्वमिन्द्रस्त्वं रुद्रस्त्वग्ं विष्णुस्त्वं ब्रह्म त्वं प्रजापतिः।
त्वं तदाप आपो ज्योती रसोऽमृतं ब्रह्म भूर्भुवः सुवरों
स्वाहा* ॥ ५० ॥
- ये सब प्राणापानव्यान० आदि मन्त्र तैत्तिरीय आरण्यक दशम प्रपाठक
अनुवाक ५१।५२।५३।५४।५५।५६।५७।५८।५९।६०।
६६।६७।६८ के हैं।