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संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 21

स्वस्तिवाचनम् १७
भ॒द्रं कर्णे॑भिः शृणुयाम देवा भ॒द्रं प॑श्येमा॒क्षभि॑र्य-
जत्राः। स्थि॒रैरङ्गैᳵस्तुष्टु॒वाꣳस॑स्त॒नूभि॒र्व्यशे॑महि दे॒वहि॑तं॒
यदायु॑ः ॥ २८ ॥
—यजुः० २५। १४, १५, १८, १९, २१ ॥
२ ३ १ २ ३ १ २ ३ २ ३ १ २
अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्यदातये।
२२ २२ ३ १ २
नि होता सत्सि बर्हिषि॥ २९ ॥
१ २ ३ २ ३ २ ३ १ २ ३ २
त्वमग्ने यज्ञानाꣳ होता विश्वेषाꣳ हितः।
३ २ ३ १ २ ३ १ २
देवेभिर्मानुषे जने॥ ३० ॥
—साम० पूर्वा० प्रपा० १। मं० १, २॥
ये त्रि॒षप्ताः परि॑य॒न्ति विश्वा॑ रू॒पाणि॑ बिभ्र॑तः।
वाच॒स्पति॒र्बला॒ तेषां॑ त॒न्वो॑ऽ अ॒द्य द॑धातु मे॥ ३१॥
—अथर्व० कां० १। सू० १। मं० १॥
॥ इति स्वस्तिवाचनम् ॥