सांख्य दर्शन / सांख्यकारिका

सांख्य दर्शन / सांख्यकारिका
Sankhya Darshan & Samkhyakarika
महर्षि कपिल / ईश्वरकृष्ण द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान · 1950 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished192 पृष्ठ
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ॐ ओ३म् ॐ
सांख्य दर्शन
भाषाटीका
प्रथमोऽध्यायः
प्र०—मनुष्य-जीवन का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
उ०—अथ त्रिविधदुःखात्यन्त निवृत्तिरत्यन्त
पुरुषार्थः ॥ १ ॥
अर्थ—तीन प्रकार के दुःखों का अत्यन्ताभाव हो जाना
प्राणीमात्र का मुख्य उद्देश्य है ।
प्र०—तीन प्रकार के कौनसे दुःख हैं ?
उ०—अध्यात्मिक, आधिभौतिक, आधिदैविक ।
प्र०—अध्यात्मिक दुःख किसको कहते हैं ?
उ०—जो दुःख शरीरान्तर में उत्पन्न हो, जैसे—ईर्ष्या, द्वेष,
लोभ, मोह, क्लेश रोगादि ।