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सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)

सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)

Sankhya Darshana with Hindi Commentary

महर्षि कपिल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished81 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 81 में से

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पृष्ठ 46

हिन्दी सांख्य दर्शन ( ३१ )
शब्द आदि पांच तन्मात्रों से आकाश आदि ५ महाभूत होते
हैं। ये ५ महाभूत विशेष कहलाते हैं। क्योंकि-ये कोई शान्त
कोई घोर, और कोई मूढ़ होते हैं। अर्थात्-सूक्ष्म शब्द आदि
तन्मात्र उपभोग योग्य नहीं होते हैं, इसी से उनके शान्तत्व
आदि धर्मों का अस्मदादिकों को अनुभव नहीं होता, अतएव ये
‘अविशेष’ पद के वाच्य होते हैं। और आकाश आदि ५ भूत
स्थूल होने से उनके शान्तत्व आदि धर्मों को हम अनुभव करते
हैं, इसी से वे विशेष कहे जाते हैं ॥ ३ ॥
विशेषों के अवान्तर विशेष ।
सूक्ष्मा मातापितृजाः सहप्रभूतैस्त्रिधा विशेषाः स्युः ।
सूक्ष्मांस्तेषां नियता मातापितृजानिवर्त्तन्ते ॥३९॥
प्रकृति से उत्पन्न होने वाले २४ तत्वों में से अनेक २
तत्वों के मेल से तीन विशेष वस्तुएं होती हैं, जिन से पुरुष
का उपभोग सिद्ध होता है। जैसे १ सूक्ष्म शरीर जो १८ तत्वों
से संग्रह किया हुआ होता है, २ रा माता पिता से उत्पन्न
होने वाला स्थूल शरीर और ३ रा विशेष महाभूत हैं । इन्हीं
तीन विभागों में बटे हुये सब प्राकृत पदार्थों का पुरुष उपभोग
करता है। इनमें सूक्ष्म शरीर की स्थिति तत्वज्ञान के उत्पन्न
होने तक रहती है, और माता पिता से होने वाले नष्ट हो
जाते हैं, तथा उसके तत्व अपनें २ समान तत्व में मरण के
अनन्तर मिल जाते हैं। इसी प्रकार महाभूत भी प्रलय काल
में अपनें २ अव्यक्त कारण में मिल ही जाते हैं ॥ ३६ ॥
सूक्ष्म शरीर का निरूपण ।
पूर्वोत्पन्नमसक्तं नियतं महदादि सूक्ष्मपर्यन्तम्।
संसरति निरुपभोगं भावैरधिवासितं लिङ्गम् ॥४०॥

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