सङ्गीतमकरन्द (देवर्षि नारद - प्राचीन भारतीय सङ्गीत, राग-रागिनी वर्गीकरण व नाद-ब्रह्म)
Sangitamakaranda of Narada (Musicology & Raga-Ragini)
देवर्षि नारद (सम्पादक: एम. आर. तेलंग) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंच्यवा चैव सन्धयन्ति तथैव च ॥ १०८ ॥"
Wait, let's look at the first word of line 23:
प with ai matra and anusvara: पैं or पै?
Then श्व or ञ्च or श्च?
Look at the ligature:
It has: a loop like 'श' and 'च': श्च, then 'मो', 'दि', 'च्य', 'वा':
Wait, is it "पैश्चमोदिच्यवा" or "पैञ्चमोदिच्यवा" or "पैञ्चमोदीच्यवा"?
Look at 'दि' / 'दी':
The matra goes to the right! It's 'दी'!
"पैश्चमोदीच्यवा" or "पैञ्चमोदीच्यवा"?
Wait, look at line 23:
"पैश्चमोदीच्यवा" or "पैञ्चमोदीच्यवा"?
Footnote 3 says:
'३ "मध्यमोदीच्यवा चैव नन्दयन्ती तथैव च" इति भ. ना. पाठ ।'
And the text in line 23:
पै - श्व/ञ्च/श्च - मो - दी - च्य - वा चैव सन्धयन्ति तथैव च ॥ १०८ ॥
Wait, look at "सन्धयन्ति":
स - न्ध - य - न्ति: सन्धयन्ति (corrupt for नन्दयन्ती)!
And the first word:
पै -