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सर्वकोश
सङ्गीतदर्पण (दामोदर पण्डित - तंजौर सरस्वती महल संस्करण, सङ्गीत एवं नाट्य लक्षण)

सङ्गीतदर्पण (दामोदर पण्डित - तंजौर सरस्वती महल संस्करण, सङ्गीत एवं नाट्य लक्षण)

Sangita Darpana of Damodara Pandita (TMSSML Edition)

दामोदर पण्डित (सम्पादक: के. वासुदेव शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 258 में से

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इति विभासः । इति रेवा ॥ ४६ ॥
(286) 'Reva' ragalakshana
(சு, 286) 'ரேவா' லக்ஷணம்.
देशाख्यसदृशा गेया कुडाई सर्वसम्मता ॥ २८७ ॥
इति कुडाई ॥ ४७ ॥
(28,7)‘ Kudayee’ lakshana.
(சு287) 'குடாயீ' லக்ஷணம்,
कल्याणसदृशी गेया आभीरी सर्वसम्मता ॥ २८८ ॥
इति आभीरी ॥ ४८ ॥
(288) 'Abhiri' lakshana.
(சு, 288) 'ஆபீரீ' லக்ஷணம்,
मालश्री जयतश्रीश्च धानाश्री मरुका तथा ।
एषां श्रुतिस्वरग्रामजात्यादिनियमो न हि
नानादेशगतच्छाया देशी रागास्तु ते स्मृताः ॥ २८९ ॥
(289) 'Malasri' 'Jayatasri' 'Dhanasri' 'Maruka'
and other Desi Ragas do not obey the laws of Sruti
Swara, Grama, and Jati.
சு (289) மாளஸ்ரீ ; 'ஜயதஸ்ரீ' ; தனாஸ்ரீ ; 'மாருகா' முதலிய
தேசி ராகங்களுக்கு ச்ருதி, ஸ்வர, க்ராம், ஜாதி நியமம் இல்லை
इति श्रीलक्ष्मीश्वर सुत चतुरदामोतर विरचिते सङ्गीतदर्पणे
'रागाध्यायः' ॥