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सर्वकोश
सङ्गीतदर्पण (दामोदर पण्डित - तंजौर सरस्वती महल संस्करण, सङ्गीत एवं नाट्य लक्षण)

सङ्गीतदर्पण (दामोदर पण्डित - तंजौर सरस्वती महल संस्करण, सङ्गीत एवं नाट्य लक्षण)

Sangita Darpana of Damodara Pandita (TMSSML Edition)

दामोदर पण्डित (सम्पादक: के. वासुदेव शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 49, कुल 258 में से

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पृष्ठ 49

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| १ | ० | ० | ० | ० | ० | ० |
| | १ | २ | ६ | २४ | १२० | ७२० |
| | | ४ | १२ | ४८ | २४० | १८०० |
| | | | १८ | ७२ | ३६० | २१६० |
| | | | | ९६ | ४८० | २८८० |
| | | | | | ६०० | ३६०० |
| | | | | | | ४३२० |
लोष्टाक्रान्तांकसंयोगात् उद्दिष्टस्यमितिर्भवेत् ।
सङ्ख्यायातु यदारूपे पृष्टे नष्टन्तदुच्यते ॥ १३३ ॥
यैरङ्कैनैष्टसङ्ख्यास्यात् मौलैकाङ्कसमन्वितः ।
नष्टतानस्वरस्थानं तैर्ज्ञात्वा तं स्वरं लिखेत् ॥ १३४ ॥
क्रमोऽत्रापि च कर्तव्यः लब्ध्वात्यागेन पूर्ववत् ।
तथैवात्रलिखेच्छिष्टमेवं नष्टोत्तरं भवेत् ॥ १३५ ॥
तानस्वरोमतोध्र्वाधः पङ्क्तिगान्त्यांकमिश्रणात् ।
एकस्वरादितानानां सङ्ख्यासंजायते स्फुटम् ॥ १३६ ॥
इति खण्डमेरु नष्टोद्दिष्ट प्रकरणम् । अथ साधारणम् ।