सङ्गीतदर्पण (दामोदर पण्डित - तंजौर सरस्वती महल संस्करण, सङ्गीत एवं नाट्य लक्षण)

सङ्गीतदर्पण (दामोदर पण्डित - तंजौर सरस्वती महल संस्करण, सङ्गीत एवं नाट्य लक्षण)
Sangita Darpana of Damodara Pandita (TMSSML Edition)
दामोदर पण्डित (सम्पादक: के. वासुदेव शास्त्री) द्वारा
DevanagariSanskritpublished258 पृष्ठ
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योगोन्त्योपान्त्यषष्ठानां अधस्तुर्याङ्कसंयुतः ।
लघुस्थाने गुरुर्ज्ञेयः शेषंतु लघुमेरुवत् ॥
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| गुरुमेरुकोष्ठम् | |||||||||
| इति गुरुमेरुलक्षणम् | |||||||||
| अथप्लुतमेरुः । | |||||||||
| प्लुतमेराोधः पङ्क्तेः पञ्च कोष्ठोनिता परा । | |||||||||
| तत्पराःस्वस्वपूर्वातः षट्षट्कोष्ठोनितामताः ॥ | |||||||||
| अधः पङ्क्तौतु षष्ठाङ्कस्थाने तुर्योऽलयुज्यते । | |||||||||
| त्रियोगोयमधः षष्ठयुक्तःस्यात्परपङ्क्तिषु ॥ | |||||||||
| प्लुतोज्ञेयो गुरुस्थाने शेषन्तुगुरुमेरुवत् । | |||||||||
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| प्लुतमेरुकोष्ठकम् | |||||||||
| इति प्लुतमेरुः | |||||||||
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