सङ्गीतदर्पण (दामोदर पण्डित - तंजौर सरस्वती महल संस्करण, सङ्गीत एवं नाट्य लक्षण)
Sangita Darpana of Damodara Pandita (TMSSML Edition)
दामोदर पण्डित (सम्पादक: के. वासुदेव शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 206, कुल 258 में से
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तन्मध्ये तु समे कोष्ठेऽन्त्यस्थानन्त्यादधस्तनः ।
अङ्कः कार्योथतैरङ्कै र्भेदसङ्ख्याऽभिधीयते ।
विषमायां ऊर्ध्वपङ्कौ स्थितैरङ्कैरधः क्रमात् ॥
एकद्रुताद्याविषमास्त्र्यादिसंख्या द्रुतभिदाः ।
सर्वद्रुतान्तामीयन्ते समपङ्क्तिस्थितैः पुनः ॥
द्रुतहीनाद्योर्द्व्यादिसमसंख्या द्रुतभिदाः ।
सर्वद्रुतान्तामीयन्तेद्रुतमेरुरयंमतः ॥
ऊर्ध्वे पङ्क्तिस्थसर्वाङ्क योगात्सङ्ख्याभिधीयते ।
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द्रुतमेरुकोष्ठम्
इति द्रुतमेरुः ।
अथलघुमेरुलक्षणम्
लघुमेरौ कोष्ठपङ्क्तीः प्राग्वन्न्यस्यतदादिमाः ।
एकैककोष्ठ एकाङ्कयुक्तोऽधः पङ्क्तिषु च ॥