सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

पृष्ठ 283, कुल 424 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 283

एकपञ्चाशतमोऽध्यायः २७३

जानुभ्यां धरणीं गत्वा दद्यादर्घं गभस्तिने ।
देयं चन्दनपङ्केन कुङ्कुमेन च लेपनम् ॥३०॥

स्वर्ण अथवा ताम्रपात्र में चन्दन, जल तथा पुष्प रखकर दोनों हाथों में लेकर जानुद्वय को पृथ्वी पर स्थापित करके सूर्यदेव के लिये अर्घ्य प्रदान करना चाहिये। तदनन्तर चन्दन एवं कुङ्कुम लगाना चाहिये।।२९-३०।।

रक्तराजीवपुष्पाद्यैरम्लानैः सुसुगन्धिभिः ।
पूजां च कुड्मलैः कुर्याद्गन्धधूपादिवासितैः ॥३१॥
कर्पूरगुग्गुलैश्चैव ह्युशीरागुरुचन्दनैः ।
तुरुष्कसारैः सर्जैर्वा धूपो देयः सुगन्धिभिः ॥३२॥

अम्लान सुगन्धित रक्तवर्ण पद्मपुष्प तथा कुङ्मल द्वारा पूजा करे। गन्ध-धूपादि से वासित कर्पूर, गुग्गुलु, उशीर, अगुरु, चन्दन, तुरुष्कासार (शिलाजीत) अथवा सुगन्धित सर्ज द्वारा पूजा करे।।३१-३२।।

रत्नेरनेकविविधैः शातकुम्भादिभूषणैः ।
खखोल्कं भूषयेद्देवं हृदये मनसा रविम् ॥३३॥
अङ्गादीनां च सर्वेषां देवतानां यथाविधि ।
पूजनं च विधातव्यः सपुष्पैश्चन्दनाम्बुभिः ॥३४॥

अनेक रत्न, विविध स्वर्णादि आभूषण द्वारा सूर्य को अलंकृत करे। मन ही मन उनका चिन्तन भी करना चाहिये। अंगादि देवगण की यथाविधि पुष्प, चन्दन तथा जल से पूजा करनी चाहिये।।३३-३४।।

षष्टिप्रदीपान् सुबहून् दद्यादर्क़ाय शक्तितः ।
शङ्खादिनिर्मितैर्घोषैः पूजयेन्मिहिरं शुभम् ॥३५॥
वेणुवीणास्वनैर्घोषैः पूजयेन्मिहिरं शुभम् ।
वक्ष्यमाणविधानेन श्रद्धया सुमनोगतम् ॥३६॥

साठ प्रदीप अथवा यथाशक्ति (अर्थात् शक्ति के अनुसार अधिक भी) सूर्य को प्रदान करना चाहिये। शङ्ख ध्वनि, दिव्यगोधर (चटचटा शब्द), वीणा तथा वेणु के शब्द द्वारा कहे गये विधानानुसार श्रद्धा एवं एकाग्र भाव से मंगलमय सूर्य की पूजा करनी चाहिये।।३५-३६।।

खखोल्कयुतमन्त्रं च जपेच्चैव सुयलतः ।
सर्वं पाद्यादिकां पूजां जपं त्रिविधमेव च ॥३७॥
न्यासः खखोल्कहृदयं रथाङ्गानां प्रकीर्तितम् ।
गुणविग्रहयोः सम्यक् वर्णनं स्तवमुच्यते ॥३८॥