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सर्वकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

पृष्ठ 217, कुल 424 में से

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पृष्ठ 217

एकोनचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः २०७

निर्दिष्ट मन्त्र द्वारा सूत्रों की आहुति देनी चाहिये। होम के अन्त में आचमन करके गुरु तथा देवताओं का विशेष विधान से पूजन करना चाहिये॥५०॥

सह तेनैव विधिना प्राग्वंशे प्राग्समाहिते।
प्रभाते कृतपुण्याहौ द्वौ तौ व्रतपरायणौ ॥५१॥
मण्डलालिखनं कुर्याद्यत्पूर्वमभिचोदितम्।
वितानध्वजमालाभिः कलशैश्च विभूषितम् ॥५२॥

प्रभात काल में दो व्रतपरायण व्यक्ति पूर्व में कथित विधि के अनुसार पूजन करें। पूर्वोक्त नियम के अनुसार मण्डल बनाकर वितान (चंदोवा), ध्वजा, माला तथा कलशों से उसे भूषित करे॥५१-५२॥

दर्पणैर्विमलैश्चैव छत्रैर्वस्त्रावगुण्ठितैः।
योगैर्नानाविधैर्मध्यैर्महाबल्युपहारकैः ॥५३॥
पूजां कुर्वीत नियतो गुरु-मन्त्र-परायणः।
कृत्वा कुशोत्तरां वेदीं चतुरङ्गुलमुच्छ्रिताम् ॥५४॥

निर्मल दर्पण, छत्र, वस्त्र द्वारा अवगुण्ठित एवं नाना योग द्वारा मध्य में महाबलि का उपहार प्रदान करके गुरुमन्त्र-परायण व्यक्ति को नित्य पूजन करना चाहिये॥५३-५४॥

पश्चिमे मण्डलद्वारे शिष्यं तत्राधिवासयेत्।
द्रुपदा प्रथमं प्रोक्तमिदमापो द्वितीयकम् ॥५४॥
कर्तृभिर्देवताभ्यश्च भास्करार्चिस्त्रिभिः परैः।
कृत्वाऽभिषेकं मन्त्री तु पुनः कृत्वा प्रदक्षिणाम् ॥५६॥
प्रविष्टे मण्डलं शिष्ये तत्त्वन्यासं प्रकल्पयेत् ॥५७॥

चार अंगुल ऊँची कुशोत्तरा वेदी तैयार करके पश्चिम मण्डल द्वार पर शिष्य को बैठाकर प्रथमतः 'द्रुपदा' इत्यादि मन्त्र से, द्वितीयतः 'इदमापः' इत्यादि मन्त्र से तथा 'कर्तृभिः देवताभ्यश्च भास्करार्चि' मन्त्र से (तृतीय मन्त्र से) अभिषेक करना चाहिये। तदनन्तर पूर्वोक्त मन्त्र से पुनः प्रदक्षिणा करके शिष्यमण्डल में प्रवेश करके नीचे लिखे मन्त्र से तत्त्वन्यास करना चाहिये॥५५-५७॥

ॐ अं शिरः, ॐ आं हृदयम्, ॐ इं नाभ्याम्, ॐ ईं ॐ चक्षुषि, ॐ ईं ॐ नासिकायाम्, ॐ फट् ॐ कर्णयोः, ॐ हुं ॐ आस्ये, ॐ क्षैं ॐ जिह्वायाम्, ॐ क्षां ॐ शिखायाम्, ॐ क्षं ॐ सर्वगात्रेषु।
न्यासमेवं विधिं कृत्वा दापयेदष्टपुष्पिकाम्।
'ॐ भूतात्मने गोपतये स्वाहा पद्ममध्ये ॐ खद्योताय स्वाहा पूर्वतः, ॐ ससत्याय स्वाहा दक्षिणतः, ॐ अमृताय स्वाहा पश्चिमतः, ॐ वक्षस्तमाय